फोटो – अमौली के पंचायत घर में छुट्टीयों के बीच बच्चों को बढ़ाते शिक्षक।
लोहाघाट। आज जब छुट्टियों को अक्सर पढ़ाई से विराम का समय माना जाता है, तब आदर्श ग्राम पंचायत अमौली ने एक सकारात्मक और दूरदर्शी उदाहरण प्रस्तुत किया है। 01 जनवरी से 31 जनवरी तक विद्यालयों की छुट्टियों के बाद भी कक्षा 1 से 12 तक के बच्चों को गाँव में ही निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। यह पहल केवल एक शिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी का सशक्त संदेश है।
इस प्रयास की विशेषता यह है कि इसकी अगुवाई किसी बाहरी संस्था ने नहीं, बल्कि स्वयं ग्राम प्रधान निशा भट्ट ने की है। पंचायत भवन को पाठशाला में परिवर्तित कर यह साबित किया गया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो संसाधनों की कमी भी बाधा नहीं बनती। गाँव के ही अनुभवी शिक्षक सुरेश चंद्र भट्ट, हिमांशु भट्ट, गिरीश चंद्र भट्ट और मोहन चंद्र भट्ट प्रतिदिन चार घंटे बच्चों को पढ़ाकर शिक्षा के प्रति अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता निभा रहे हैं।
यह पहल उस समय और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों का पढ़ाई से जुड़ाव बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। छुट्टियों में निरंतर अध्ययन से बच्चों की शैक्षणिक गति बनी रहती है और उनमें सीखने की आदत भी मजबूत होती है। अमौली का यह प्रयास यह भी दर्शाता है कि शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। आज आवश्यकता है कि ऐसी पहलों को केवल सराहना तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें नीति और व्यवहार दोनों स्तरों पर प्रोत्साहित किया जाए। यदि हर पंचायत अमौली की तरह बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दे, तो ग्रामीण शिक्षा की तस्वीर बदल सकती है। निस्संदेह, जब प्रधान संवेदनशील हों और शिक्षक समर्पित, तब पंचायत केवल प्रशासनिक इकाई नहीं रहती, बल्कि ज्ञान का केंद्र बन जाती है। अमौली पंचायत ने यही करके दिखाया है।
