गोरखनाथ मठ में बाबा जसवंत नाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब , संत समागम, हवगुरुन-यज्ञ और अखंड धूणे के साक्षी बने देशभर से आए श्रद्धालु

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फोटो – बाबा जसवंत नाथ जी महाराज की बरसी पर गुरु गोरखनाथ मठ में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु। विश्व कल्याण के लिए हवन यज्ञ करते संतगण।

चम्पावत। गुरु गोरखनाथ मठ में आज सिद्ध पुरुष बाबा जसवंत नाथ जी महाराज की पुण्यतिथि के पावन अवसर पर गहरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। प्रातःकाल बाबा जसवंत नाथ जी के प्रतीकात्मक स्नान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। मठ परिसर भक्तिमय वातावरण में “हर-हर महादेव” और “जय गुरु गोरखनाथ” के जयघोष से गूंज उठा।

इस अवसर पर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों से नाथ संप्रदाय के संत-महात्माओं का भव्य समागम हुआ। नाथ संप्रदाय का यह विश्व प्रसिद्ध मठ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है, जहां पीढ़ियों से लोग पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। प्रातः आश्रम के बाबा रामनाथ जी महाराज की देखरेख में पंडित धीरेंद्र पांडे द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं विश्व कल्याण हेतु हवन-यज्ञ संपन्न कराया गया।

हवन-यज्ञ में रोहतक से पधारे बाबा शंकर नाथ जी, बाबा विजय नाथ जी, साईं नाथ जी, जमुना गिरी जी महाराज तथा मानेसर धाम के धर्मराज पुरी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं ने सहभागिता की और श्रद्धालुओं को अपना दिव्य आशीर्वाद प्रदान किया। संतों की उपस्थिति से मठ परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरु गोरखनाथ मठ की विशेष पहचान यहां सतयुग से प्रज्वलित अखंड धूणा है, जो शताब्दियों से निरंतर जलता आ रहा है। श्रद्धालु इस अखंड धूणे में लकड़ी अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं रखते हैं। मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर बाबा जसवंत नाथ जी महाराज ने 28 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। यह तीर्थ स्थल नेपाल सीमा से लगे 84 गांवों की नाली से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण नेपाल में भी बाबा के असंख्य श्रद्धालु हैं।

मठ में शताब्दियों से विभूति को ही प्रसाद के रूप में प्रदान किए जाने की परंपरा चली आ रही है। विशेष मान्यता है कि यहां श्रद्धा भाव से आने वाली निसंतान महिलाओं की गोद भरती है, जिससे यह स्थान जन-जन की आस्था का अद्वितीय केंद्र बना हुआ है। चारों ओर से घिरे हरे-भरे वनों को लेकर मान्यता है कि इन वनों की रक्षा स्वयं अष्टभैरव करते हैं, इसी कारण आज तक यहां के वनों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

संतों के वरदान से जुड़ी मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ मठ में आने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं लौटता, यहां की सभी व्यवस्थाएं मानो अदृश्य शक्तियों द्वारा स्वतः संचालित होती हैं। बाबा जसवंत नाथ जी महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दराज क्षेत्रों से मठ पहुंचे। इस अवसर पर देश के विभिन्न अंचलों से आए संत-महात्माओं का मठ प्रबंधक बाबा रामनाथ जी महाराज द्वारा आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया।

 

 

 

 

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