पंचेश्वर बना पर्यटन और रोजगार की नई उम्मीद,सरयू–महाकाली संगम में “एंग्लिंग” डीएम मनीष कुमार ने दिए विश्व स्तरीय एंग्लिंग मीट के संकेत

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फोटो – पंचेश्वर में सरयू व महाकाली नदी के संगम पर रॉड डालकर एंग्लिंग करते जिलाधिकारी मनीष कुमार।

 

चम्पावत। जिलाधिकारी मनीष कुमार के पंचेश्वर क्षेत्र के दौरे ने नदी पर्यटन, एंग्लिंग और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को नई दिशा दे दी है। सरयू, महाकाली एवं महानदी के संगम स्थल पर स्वयं एंग्लिंग कर जिलाधिकारी को यह पूर्ण विश्वास हुआ कि पंचेश्वर क्षेत्र को एंग्लिंग के माध्यम से देसी-विदेशी एंग्लरों का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है। डीएम ने संगम में एंग्लिंग कर लगभग एक किलो वजनी मछली पकड़ी, जिसे बाद में सुरक्षित रूप से नदी में छोड़ दिया गया। इस अनुभव के बाद उन्होंने कहा कि पंचेश्वर क्षेत्र में विश्व स्तरीय एंग्लिंग मीट आयोजित कर पर्यटन और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खोले जा सकते हैं। जिलाधिकारी के आगमन पर महाशीर संरक्षण समिति एवं महाशीर मत्स्य जीवी सहकारी समिति के सदस्यों होशियार सिंह, गणेश सिंह, श्याम दत्त, रमेश चंद्र, महेश चंद्र, ओमकार धोनी सहित अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया। समिति सदस्यों ने बताया कि पंचेश्वर संगम स्थल एक प्राकृतिक रूप से विकसित विश्व स्तरीय एंग्लिंग सेंटर है, जहां बुनियादी सुविधाओं के विकास से नदी पर्यटन, एंग्लिंग और राफ्टिंग को बढ़ावा मिल सकता है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि संगम क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यहां पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजाति की सुनहरी महाशीर मछली है। अब तक यहां 84 पाउंड वजनी मछली पकड़े जाने का रिकॉर्ड दर्ज किया जा चुका है। यह क्षेत्र पूर्णतः प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, जहां मानवीय हस्तक्षेप नगण्य है। समिति द्वारा जिलाधिकारी का ध्यान सड़क, संचार, स्वास्थ्य सेवाएं, होमस्टे, पर्यटक सुविधाएं और आधारभूत ढांचे के विकास की ओर आकर्षित किया गया। जिलाधिकारी ने मौके पर ही महसूस किया कि पंचेश्वर क्षेत्र में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं और इसके लिए एक समग्र योजना तैयार की जाएगी। गौरतलब है कि वर्ष 2002 में कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा इंडियन फिश कंजर्वेशन के सहयोग से यहां अंतरराष्ट्रीय एंग्लिंग मीट का आयोजन किया गया था, इससे पहले तत्कालीन सैनाध्यक्ष जनरल रोड्रिक सहित कई विदेशी एंग्लरों ने भाग लेकर इस स्थल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी, हालांकि उस समय संसाधनों का अभाव था।

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