रात के सन्नाटे में प्रशासन का उजाला, मुलाकोट की चौपाल में जिलाधिकारी बने सहारा, पीड़ितों को मिला भरोसा ,आठ साल से अपने दो बच्चों के साथ गरीबी का दंश झेल रही कमला के लिए वरदान साबित हुई यह चौपाल

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फोटो: ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाकर अपने अंदाज में उनकी समस्याएं जिलाधिकारी मनीष कुमार।

 

लोहाघाट: विकास खंड पाटी के मूलाकोट की पहाड़ियों में जब आम तौर पर रात खामोश हो जाती है, उसी वक्त प्रशासन ने जनता की आवाज़ सुनने का फैसला किया। विकासखंड पाटी की ग्राम सभा मुलाकोट के मज्याप गांव में जिलाधिकारी मनीष कुमार की रात्रि चौपाल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई।

इस चौपाल में काग़ज़ों की नहीं, ज़मीनी हकीकत की बात हुई और फैसले भी मौके पर हुए।

सबसे मार्मिक मामला कमला देवी का रहा, जो पिछले आठ वर्षों से पति के परित्याग के बाद दो नाबालिग बच्चों के साथ संघर्षपूर्ण जीवन जी रही हैं। पेंशन, राशन और बच्चों के भविष्य की चिंता लेकर जब उन्होंने अपनी बात रखी, तो जिलाधिकारी ने इसे फाइलों में नहीं उलझाया बल्कि स्वयं सत्यापन कराते हुए समाज कल्याण और प्रोबेशन विभाग को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत बच्चों को संरक्षण का रास्ता खुला।

इसी तरह दीपा देवी, जिनके पति का आठ वर्ष पूर्व निधन हो चुका है, दो बच्चों के साथ आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। प्रशासन ने उनके दर्द को समझा और न सिर्फ वात्सल्य योजना से आच्छादन के निर्देश दिए, बल्कि आत्मनिर्भरता के लिए गौशाला उपलब्ध कराने की पहल भी की।

केसरी देवी की आवास की पीड़ा पर भी प्रशासनिक संवेदना दिखी। खंड विकास अधिकारी को प्राथमिकता के आधार पर आवास स्वीकृति के निर्देश दिए गए।

चौपाल में केवल व्यक्तिगत समस्याएं ही नहीं, बल्कि गांव की सामूहिक ज़रूरतें भी मुखर रहीं—

मोहन सिंह द्वारा सड़क से निर्माण सामग्री हटाने का मामला

कुंदन सिंह की गौशाला निर्माण की मांग, थाला क्षेत्र में सीसी मार्ग निर्माण मुलाकोट से मज्याप तक सड़क डामरीकरण की मांग

इन सभी प्रकरणों में जिलाधिकारी ने एक स्वर में “तत्काल कार्रवाई” के निर्देश देकर यह संदेश दिया कि जनसमस्याएं अब टाली नहीं जाएंगी। इस रात्रि चौपाल में जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद अधिकारी, ईई लोनिवि हितेश कांडपाल सहित तमाम विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

यह चौपाल एक संदेश है कि जब प्रशासन जनता के बीच आता है, तो योजनाएं काग़ज़ों से निकलकर ज़िंदगियों में उतरती हैं।

मुलाकोट की रात में जली यह प्रशासनिक रोशनी, भरोसे की एक नई सुबह का संकेत है।

 

 

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