

भारत और रूस एक-दूसरे के देश में तीन हजार सैनिकों के साथ साथ 10 लड़ाकू विमान और पांच युद्धपोत (RELOS Agreement) की तैनाती पर सहमत हो गये हैं। रूस की स्पुतनिक न्यूज एजेंसी ने ये जानकारी दी है। इसका मतलब है कि अब भारत में रूस के सैनिक तैनात होंगे और रूस में भारतीय सैनिकों की तैनाती हो सकेगी। दशकों पुराने दोनों रणनीतिक साझेदारों के बीच हुआ ये ऐतिहासिक करार है। स्पुतनिक ने बताया है कि रूस के आधिकारिक कानूनी सूचना पोर्टल पर प्रकाशित एक समझौते में इस व्यवस्ता के बारे में बताया गया है। इस व्यवस्था में एक ही समय में 10 सैन्य विमानों और 5 युद्धपोतों की तैनाती की भी अनुमति है।
स्पुतनिक के मुताबिक यह समझौता सैन्य इकाइयों, नौसैनिक जहाजों और लड़ाकू विमानों की आपसी तैनाती के नियमों की रूपरेखा तैयार करता है। इसके साथ ही किसी भी देश की तरफ से मेजबानी की जा रही सेनाओं के लिए लॉजिस्टिक, तकनीकी और ऑपरेशनल सहायता को भी शामिल करता है। इसके अलावा रूसी न्यूज एजेंसी 1.ru ने बताया है कि इस दस्तावेज में 21 अनुच्छेद शामिल हैं और यह पांच वर्षों के लिए वैध रहेगा और अगर दोनों देशों में किसी को भी आपत्ति नहीं होती है तो ये करार अपने आप बढ़ता रहेगा। इसमें उन स्थितियों का उल्लेख किया गया है जिनमें सैन्य कर्मियों को किसी अन्य देश में भेजा जा सकता है।
समझौते की मुख्य विशेषताएं:
सैन्य तैनाती: एक समय में अधिकतम 3,000 सैनिक, 10 विमान और 5 युद्धपोत की तैनाती संभव होगी।
रणनीतिक पहुँच: भारत को रूस के आर्कटिक क्षेत्र सहित महत्वपूर्ण नौसैनिक और वायु सेना अड्डों तक पहुँच मिलेगी।
लॉजिस्टिक्स सपोर्ट: दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों का इस्तेमाल ईंधन, मरम्मत और रसद आपूर्ति के लिए कर सकेंगे।
उद्देश्य: यह समझौता साझा सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभियानों और मानवीय सहायता को आसान बनाएगा, जो रक्षा साझेदारी में एक नया अध्याय है।


