फोटो – मौसम के लम्बे अरसे बाद बारिश होने से दमकती और चमकतीं प्रकृति का नजारा।
चंपावत। लगातार तीन माह तक किसान जमीन और आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे रहे, आखिरकार मेघराज बरस पड़े। तेज हवा और गरज के साथ हुई वर्षा से लोगों ने बड़ी राहत महसूस की। बारिश से न केवल मौसम में ताज़गी आई है, बल्कि इसे जंगलों को आग से बचाने, खेती को संजीवनी देने और पेयजल संकट से उबरने का एक मजबूत माध्यम माना जा रहा है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार जनपद में अलग-अलग स्थानों पर वर्षा दर्ज की गई। चंपावत में 35 मिमी, लोहाघाट में 10.30 मिमी, पाटी में 10 मिमी तथा टनकपुर में 7.40 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। हैरानी की बात यह रही कि चंपावत और लोहाघाट के बीच मात्र 13 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद वर्षा के आंकड़ों में भारी अंतर देखने को मिला। यह स्थिति या तो लोहाघाट में स्थापित वेदर सिस्टम की खराबी की ओर इशारा करती है या फिर आंकड़ों के संकलन में लापरवाही का संकेत देती है, जिस पर संबंधित विभागों को गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए।
वहीं मौसम की पहली अच्छी बारिश के साथ ही लोहाघाट क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बाधित हो गई। तेज हवा और बारिश के कारण कई स्थानों पर बिजली लाइनें प्रभावित हुईं। इसके बावजूद विद्युत विभाग के कर्मी खराब मौसम और ठंड के बीच लगातार कार्य करते रहे और नगर के बड़े हिस्से में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गई। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग रातभर अंधेरे में डूबे रहे, जहां शनिवार को विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारु की जा सकी। बारिश के बाद जनपदवासियों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और वर्षा होने से खेती, जंगल और जलस्रोतों को मजबूती मिलेगी तथा जनजीवन को स्थायी राहत मिल सकेगी।


