

फोटो – धरना स्थल पर विधायक खुशाल सिंह अधिकारी आंदोलनकारी डिप्लोमा इंजीनियर्स का समर्थन करते हुए।
शासन पर बेरुखी का आरोप, आंदोलनकारियों का ऐलान “अब आर-पार की लड़ाई” कांग्रेस विधायक के साथ यूकेडी भी उतरी समर्थन में, धरना स्थल पर गरजे इंजीनियर्स।
चंपावत। लोहाघाट में उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स का 27 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ बेमियादी धरना प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। शासन की अनदेखी और बेरुखी से नाराज इंजीनियर्स का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। धरना स्थल पर आज क्षेत्रीय विधायक एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुशाल सिंह अधिकारी ने सत्यम अधिकारी के साथ पहुंचकर आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। विधायक ने स्पष्ट कहा कि वे डिप्लोमा इंजीनियर्स की समस्याओं को भलीभांति समझते हैं और उनकी आवाज को शासन तक मजबूती से उठाएंगे। वहीं यूकेडी के कार्यकर्ताओं ने भी आंदोलनकारियों के समर्थन में उतरकर इस आंदोलन को और मजबूती दी। इंजीनियर प्रबुद्ध शर्मा की अध्यक्षता और ऋषभ शाह के संचालन में आयोजित सभा में आंदोलनकारियों का गुस्सा साफ झलकता दिखा। वक्ताओं ने कहा कि एक ओर कर्मचारी 60 वर्ष तक सेवा देते हैं, जबकि विधायक और सांसद मात्र 5 साल में पेंशन के हकदार बन जाते हैं। यह व्यवस्था पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। महासंघ के जिला अध्यक्ष गोपाल कालाकोटी ने बताया कि शासन स्तर से वार्ता का निमंत्रण मिला था, लेकिन उसका मसौदा आंदोलन को कमजोर करने वाला प्रतीत हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल “झुनझुना” दिखाकर आंदोलन को तोड़ना चाहती है, जिसे इंजीनियर्स ने सिरे से खारिज कर दिया है। धरना स्थल पर परमानंद पुनेठा, प्रशांत वर्मा, पवन बिष्ट, नरेंद्र मोहन गढ़कोटी, किशोर राठौड़, ललित भट्ट, सुधीर कुमार, रेनू कुमारी, कुमारी अल्का, रामनिवास राणा, चेतन ओली, संदीप कुमार, सचिन पुनेठा सहित कई इंजीनियर्स ने अपने विचार रखते हुए शासन से मांगों को तत्काल मानने की अपील की।
आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी—अब यह लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। उधर डिप्लोमा इंजीनियर्स का धरना प्रदर्शन 19वे दिन भी जारी रहा।


