फोटो – स्वाला डेंजर जोन में रात 12 बजे मजदूरों के बीच जिलाधिकारी मनीष कुमार
चंपावत को मिला ‘मैदान में उतरकर काम करने वाला’ जिलाधिकारी — मनीष कुमार की 14 घंटे की कार्यसंस्कृति बनी पहचान।
आधी रात गुलदार प्रभावित इलाकों से लेकर स्वाला डेंजर जोन तक सक्रिय डीएम, जमीनी निगरानी से तेज़ हुई विकास रफ्तार।
चंपावत। जिले को पहली बार ऐसा जिलाधिकारी मिला है, जिनके काम करने की कोई तय समय-सीमा नहीं दिखती। जिलाधिकारी मनीष कुमार की औसत कार्यशैली 14 घंटे से अधिक की है और यही कारण है कि आज जिला हर क्षेत्र में नई गति पकड़ता नजर आ रहा है। दिन हो या रात, आपदा हो या विकास कार्य—डीएम मनीष कुमार हर मोर्चे पर स्वयं मौजूद रहकर हालात की कमान संभालते दिखाई देते हैं।
एक रोज पहले जहां जिलाधिकारी को कड़ाके की ठंड के बीच गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में रात देर तक पेट्रोलिंग करते देखा गया, वहीं शुक्रवार की रात ठीक 12 बजे वह मुख्य राजमार्ग के स्वाला डेंजर जोन में निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लेने पहुंच गए। सुरक्षा की दृष्टि से यहां सड़क को रातभर वाहनों की आवाजाही के लिए बंद रखा गया, ताकि निर्माण कार्य तेज़ी और सुरक्षित ढंग से पूरा किया जा सके। गौर करने वाली बात यह है कि जिलाधिकारी का रात में फील्ड में निकलना कोई नई बात नहीं है। डीएम की कुर्सी संभालने के बाद जब भी राष्ट्रीय राजमार्ग या अन्य प्रमुख सड़कों पर यातायात बाधित होता है, वह रात के समय स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते हैं। इसका सीधा असर यह हुआ है कि दिन के समय यातायात सुचारू बना रहता है और रात में पारियों में काम लगातार चलता रहता है।
इस दौरान साइट पर काम कर रहे मजदूर हों या जेसीबी-पोकलैंड मशीनों के ऑपरेटर—सभी के साथ जिलाधिकारी का एक आत्मीय रिश्ता बन गया है। दीपावली के अवसर पर जब डीएम स्वयं मजदूरों के बीच पहुंचे और उन्हें मिठाई खिलाकर त्यौहार की खुशियां साझा कीं, तो काम करने वालों का उत्साह और मनोबल कई गुना बढ़ गया।
दरअसल, जिलाधिकारी मनीष कुमार का काम करने और सोचने का अपना अलग ही नजरिया है। वह फाइलों तक सीमित रहने के बजाय जमीन पर उतरकर हालात समझने में विश्वास रखते हैं। उनकी इसी कार्यसंस्कृति को जिले के लोग खूब पसंद कर रहे हैं। परिणामस्वरूप आज चंपावत जिला विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता—हर क्षेत्र में नई दौड़ लगाता नजर आ रहा है।


