देहरादून के उत्तरायणी कौथिक में छाया चंपावत मॉडल जिले के जैविक उत्पाद व स्वाद की “ब्रांड एंबेसडर” बनी गीता धामी , प्रगति मैदान में मॉडल जिले के उत्पादों पर उमड़ी भीड़, गीता धामी ने की जमकर खरीददारी

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फोटो – उत्तरायणी कौतिक में हरीश जोशी के स्टॉल से खरीदारी करतीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धर्मपत्नी गीता धामी।

चंपावत। देहरादून के प्रगति मैदान में चल रहे उत्तरायणी कौतिक में “चंपावत मॉडल” जिले से ले जाए गए जैविक उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जैविक मसाले, अचार, पहाड़ी नमक, शहद और औषधीय उत्पादों की मांग इतनी अधिक है कि स्टॉलों पर लोग टूट पड़ रहे हैं और कई उत्पाद मांग के मुकाबले कम पड़ते नजर आ रहे हैं। सुखीडांग के उद्यमी हरीश जोशी के स्टॉल पर औषधीय गुणों से भरपूर शहद ने खास पहचान बनाई है। चूयूरा फूल से तैयार सफेद क्रीम हनी और ऐसालू के सफेद शहद को हृदय रोगों के लिए अचूक प्राकृतिक औषधि माना जा रहा है। वहीं किलमोडा़ का येलो हनी अपने अनोखे स्वाद और सुगंध के कारण ग्राहकों को खूब लुभा रहा है। इसके साथ ही पदम से तैयार शहद को दमा रोगियों के लिए बेहद लाभकारी बताया जा रहा है, जिसकी भारी मांग देखी जा रही है।

स्टॉल पर काली हल्दी, तिमुर, काली सिठी, तेजपात, दालचीनी, भंगिरा, पहाड़ी जैविक अदरक और विभिन्न औषधीय मसालों को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह है। तिमुर का तीखा स्वाद भले ही अलग पहचान रखता हो, लेकिन इसे अनेक रोगों में लाभकारी माना जाता है। काली हल्दी को लेकर भी ग्राहकों में खास उत्सुकता देखने को मिल रही है। इसके अलावा यहां के पहाड़ी अचार अपने अलग स्वाद और शुद्धता के कारण खूब पसंद किए जा रहे हैं। उत्तरायणी कौतिक में पहुंचे आगंतुकों के लिए यह स्टॉल पहाड़ के स्वाद और सेहत का संगम बन गया है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धर्मपत्नी गीता धामी ने भी हरीश जोशी के स्टॉल पर पहुंचकर न केवल जमकर खरीदारी की, बल्कि अन्य लोगों को भी चंपावत के इन उत्पादों को अपनाने और ले जाने के लिए प्रेरित किया। गीता धामी ने इन जैविक और औषधीय उत्पादों की खुले मंच से सराहना की, जिससे वे अनौपचारिक रूप से इन उत्पादों की “ब्रांड एंबेसडर” बनती नजर आईं।

वहीं दूसरी ओर धुनाघाट के कैलाश द्वारा हाथ से निर्मित पारंपरिक लोहे की कढ़ाइयों पर भी लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इन कढ़ाइयों की विशेषता यह है कि इनमें बना भोजन अधिक स्वादिष्ट होता है और प्राकृतिक रूप से उसमें लौह तत्व की मात्रा बढ़ जाती है। नींबू से रगड़ने पर इन कढ़ाइयों में चांदी जैसी चमक आ जाना लोगों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है।

उत्तरायणी कौतिक में चंपावत के उत्पादों को मिल रहा यह उत्साह न केवल स्थानीय उद्यमियों का मनोबल बढ़ा रहा है, बल्कि पहाड़ी जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।

 

 

 

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