नववर्ष व नवरात्र को लेकर भ्रम, लेकिन पूर्णागिरि में आस्था का सैलाब—पहले दिन ही उमड़ी भारी भीड़ ,मेला मजिस्ट्रेट खुद लाइन में लगे, दिया संदेश “मां के दरबार में सब बराबर”; व्यवस्थाओं और व्यवहार ने जीता श्रद्धालुओं का दिल

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फोटो – मंदिर में दर्शन-आरती के लिए कतार में खड़े मेला मजिस्ट्रेट डॉ. ललित मोहन तिवारी व श्रद्धालु; किरोड़ा नाले का अस्थायी पार्किंग स्थल वाहनों से खचाखच भरा।

टनकपुर/चम्पावत। सनातन नववर्ष और चैत्र नवरात्र की तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में भले ही भ्रम की स्थिति बनी रही—कुछ ने गुरुवार से नवरात्र शुरू किए तो कई शुक्रवार से शुभारंभ की तैयारी में हैं—लेकिन इसका असर आस्था पर नहीं पड़ा। उत्तर भारत के प्रसिद्ध पूर्णागिरि धाम में पहले दिन ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह तड़के 4 बजे से ही श्रद्धालु कतारों में लगना शुरू हो गए थे। मंदिर परिसर और मार्गों पर लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिलीं। पार्किंग व्यवस्था भी पूरी तरह भर गई—किरोड़ा नाले में बनाए गए अस्थायी पार्किंग स्थल वाहनों से खचाखच भरे रहे। इस बीच मेला मजिस्ट्रेट डॉ. ललित मोहन तिवारी ने स्वयं आम श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर दर्शन-आरती की। उनके इस व्यवहार ने एक बड़ा संदेश दिया कि मां के दरबार में सभी समान हैं। श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे मेले की गरिमा और भी बढ़ी है।

मेले में व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित होती नजर आईं। बुलंदशहर से आए श्रद्धालु वेद प्रकाश, प्रेम प्रकाश और आशुतोष ने बताया कि हर साल व्यवस्थाओं में सुधार हो रहा है और इस बार अधिकारियों व कर्मचारियों का व्यवहार काफी सराहनीय है, जिससे यात्रियों की थकान तक दूर हो रही है। खास बात यह रही कि मेला मजिस्ट्रेट डॉ. तिवारी कई स्थानों पर स्वयं वृद्ध और असहाय श्रद्धालुओं की मदद करते नजर आए। उनके इस व्यवहार का सकारात्मक असर अन्य कर्मचारियों में भी साफ दिखाई दे रहा है। जिलाधिकारी मनीष कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पूर्णागिरि आने वाले श्रद्धालु “मेहमान” ही नहीं, बल्कि “भाग्य विधाता” हैं। इसी भावना के साथ पूरे मेले में सेवा और सम्मान का वातावरण देखने को मिल रहा है। वहीं, पूर्व पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के कार्यकाल में विकसित की गई संवेदनशील कार्यशैली का असर भी इस बार मेले में साफ नजर आ रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को सुखद अनुभव मिल रहा है।

 

 

 

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