बारिश के बाद भी किसानों के चेहरों पर मायूसी। सड़क सुविधा के अभाव में नहीं हो पा रहा है सीजनल सब्जियों का उत्पादन ,दो साल से मुख्यमंत्री की अधूरी घोषणा ने किसानों की उम्मीदों पर फेरा पानी।

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फोटो: सड़क के अभाव में पुस्तैनी खेत बंजर भूमि में तब्दील होते हुए।

लोहाघाट: पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में हो रही बारिश और बर्फबारी ने जहां किसानों के चेहरों की रौनक बढ़ाई है वहीं गोलाना सेरी, बसान और बांस बंसवाड़ी घाटी के किसानों की उम्मीद पर राज्य सरकार ने पानी फेरने का काम किया है। आलम यह है कि इस घाटी के 50 प्रतिशत किसान सब्जी उत्पादन का काम छोड़ने का मन बना चुके हैं जिससे खेतों में खर पतवार उगने लगे हैं। यहां के किसानों का कहना है कि गांव के युवा सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में मैदानी क्षेत्रों मे रोजगार के लिए जा चुके हैं। जो ग्रामीण अपनी पुस्तैनी खेती अभी तक कर रहे हैं उन्हें सड़क न होने से स्थानीय उत्पाद को बाजार तक ले जाना मुश्किल हो रहा है। फरवरी 2024 में घिंघारुकोट से बांस बंसवाड़ी तक मुख्यमंत्री की 4 किमी सड़क बनाने की घोषणा से किसानों में उम्मीद जागी थी लेकिन साल खाम होते होते किसान खुद को ठगा महसूस करने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सीएम केवल अपनी विधानसभा सीट पर ही विकास एवं घोषणाओं को पूरा करने तक सीमित हैं, ग्रामीण विकास से उन्हें कोई लेना देना नहीं है। काश्तकारों का कहना है कि कभी मौसम की मार तो कभी मंडी में उत्पादन का उचित दाम न मिलना, ऊपर से उपज को लंबी दूरी तय कर सड़क तक पहुंचाने की समस्या ने हमारी कमर ही तोड़ दी है। आलम यह है कि खेती किसानी से लह लहाते खेते बंजर में तब्दील हो रहे हैं।

 

 

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