आज हम आपको ईमान दारी को लेकर पहाड़ के दूर दराज गांव सखौला गांव के बिजली का काम करने वाले मुकेश चौहान के ईमानदारी के बारे में बताने से पहले पहाड़ी के व्यक्ति और उसके व्यवहार को लेकर बतायेंगे हालांकि पहाड़ी और पहाड़ी दोनों में थोड़ा अंतर यह है कि पहाड़ी वे लोग हैं जिनकी क ई पुश्तों का जीवन 150-200 साल पहले पहाड़ों के एकांत में कठिन परिस्थितियों में बीता हो । ना कि आज मैदानी और अलग-अलग राज्यों के लोगों ने पहाड़ों पर अपने आशियाने बना दिए लेकिन पहाड़ियत उनके अंदर कभी नहीं हो सकती।
तो बात हम गांव के व्यक्ति को लेकर कर रहे थे जो किसी काम से जिला मुख्यालय अल्मोड़ा गये हुए थे और वहां उन्हें रास्ते में रुपयों से भरा एक आदमी का पर्स (बटुवा) मिला जिसमें उन्होंने बहुत सारे कार्ड वगैरह देखें और उन्होंने उस पर्स को सीधे कोतवाली अल्मोड़ा में दे दिया उन्होंने बताया कि उसमें उन्हें एक आधार कार्ड मिला जिसमें बलजीत कुमार लिखा हुआ था जोकि उधम सिंह नगर का रहने वाला था मोबाइल नंबर नहीं होने से उन्होंने उस पर्स को पुलिस को देना उचित समझा और बाद में उसी दिन जब वे रानीखेत आ रहे थे तो उस व्यक्ति का उन्हें फोन आया और उनका बहुत बहुत आभार जताया। जिसके लिए उन्होंने उसे अपनी ईमानदारी का परिचय दिया कुल मिलाकर हमारे पहाड़ी आज भी अपने ईमानदारी और सीधा स्वभाव के लिए देश दुनिया में जाने जाते हैं।
हालांकि जब आज समय बदल गया है तो पहाड़ों में भी अब ईमानदारी का ग्राफ गिरा है लेकिन मुकेश चौहान जैसे छोटे से गांव सखौला के व्यक्ति ने अपनी ईमानदारी का परिचय देकर उन लोगों का विश्वास जीता है जो ईमानदारी पर भरोसा रखते हैं और बेईमानी वालों का कभी साथ भी नहीं देते हैं । और में चीजें मात्र आपको ईमानदार निष्ठावान पर्वतीय इलाकों में ही देखने को मिलेंगी ऐसे मुकेश चौहान ने ईमानदारी का परिचय देकर क ई लोगों का विश्वास जीता है
।