उत्तराखंड राज्य स्थापना के सिल्वर जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की दी मेगा सौगातें

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देहरादून /उत्तराखंड

उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देहरादून से राज्य को 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की मेगा सौगातें दीं।

भव्य समारोह में पीएम ने कहा — “यह 25 वर्ष उत्तराखंड की उपलब्धियों के रहे, अब आने वाले 25 वर्ष होंगे विकास और गौरव के!”

9 नवंबर 2025 को देवभूमि उत्तराखंड का 25वाँ स्थापना दिवस (सिल्वर जयंती) बड़े समारोह के रूप में मनाया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कई अहम घोषणाएँ कीं। आइए जाँचे कि कौन-कौन-सी घोषणाएँ हुईं, कार्यक्रम में क्या हुआ और राज्य को क्या ‘सौगात’ दी गई है।

9 नवंबर 2025 को देवभूमि उत्तराखंड का 25वाँ स्थापना दिवस (सिल्वर जयंती) बड़े समारोह के रूप में मनाया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कई अहम घोषणाएँ कीं।

कार्यक्रम स्थल Forest Research Institute, Dehradun (देहरादून) था, जहां प्रधानमंत्री ने समारोह में भाग लिया।

 

उन्होंने राज्य की 25वीं स्थापना वर्षगाँठ के अवसर पर समारोह को संबोधित किया और साथ ही एक स्मारक डाक टिकट जारी किया।

 

इस अवसर पर विभिन्न विकास-परियोजनाओं का उद्घाटन तथा भूमि-पूजन किया गया।

प्रमुख घोषणाएँ एवं सौगातें

विकास-परियोजनाएँ

प्रधानमंत्री ने कुल लगभग ₹8,140 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन व भूमि-पूजन किया, जिनमें शामिल हैं: पेयजल, सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, खेल और कौशल विकास।

 

किसानों को भी राहत: लगभग ₹62 करोड़ सीधे बैंक खाते में भेजे गए, लगभग 28,000 से अधिक किसानों के लिए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत।

राज्यवासियों को शुभकामनाएँ व विकास हेतु संदेश

मोदी ने ट्विटर (या X) पर अपने संदेश में कहा: “25वीं वर्षगाँठ पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ … देवभूमि अपनी प्रगति के हर क्षेत्र में आज आगे बढ़ रही है।”

 

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड का अगला 25 वर्ष विकासयुक्त होना चाहिए और केंद्र- राज्य मिलकर काम कर रहे हैं।

 

पर्यटन, संस्कृति और पर्यावरण के प्रति जोर

पिछले वर्ष के संदर्भ में, उन्होंने राज्यवासियों व पर्यटकों से अपनी बोलियाँ (गढ़वाली, कुमाऊँनी) संरक्षण करने, नदी-नालों को सुरक्षित रखने, पुराने पारंपरिक घरों को होम-स्टे में विकसित करने जैसे आग्रह किए थे।

 

इस वर्ष भी विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों, हिमालयी पारिस्थितिकी व लोकसंस्कृति को दृष्टि में रखने का संदेश सामने आया है।

 

विश्लेषण – क्या मायने रखती हैं ये घोषणाएँ?

₹8,000 करोड़+ की परियोजनाएँ संकेत देती हैं कि केंद्र सरकार उत्तराखंड को विकास के विशेष फोकस में रख रही है। इससे राज्य में बुनियादी ढाँचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) मजबूत होगा।

 

किसानों के लिए सीधे बैंक हस्तांतरण यह संकेत है कि कृषि-वित्त एवं बीमा व्यवस्था को वहाँ गंभीरता से लिया जा रहा है — खासकर पर्वतीय व संकरी भू-भाग वाले क्षेत्रों में।

 

संस्कृति-पर्यटन-पर्यावरण को मिलाकर ‘हिमालयी विकास’ का नया मॉडल दिखता है — जहाँ सिर्फ सड़क-ब्रिज नहीं बल्कि होम-स्टे, भाषा-संस्कृति, अनुभवात्मक पर्यटन (एडवेंचर, वेलनेस) भी अहम होंगे।

 

संदेश का दूसरा पहलू यह है कि विकास सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहेगा — इस तरह की घोषणाएँ ग्रामीण, पहाड़ी क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में हैं।

 

हालांकि, घोषणाएँ लागू होना ज्यादा मायने रखता हैं: यह देखना होगा कि ये परियोजनाएँ कब तक पूर्ण होंगी, कब तक लाभ पहुँचेगा, और स्थानीय लोगों को किस हद तक भागीदारी मिलती है।

 

राज्य के विकास में धामी को मिली ऐतिहासिक सफलता

उत्तराखंड के इस स्थापना दिवस ने सिर्फ जश्न का रूप नहीं लिया, बल्कि एक नए विकास अभियान के संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई घोषणाएँ यह बताती हैं कि केंद्र-राज्य मिलकर इस पहाड़ी राज्य को अगले 25 वर्षों में “विकसित उत्तराखंड” बनाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। अब चुनौतियाँ होंगी – समय पर कार्यान्वयन, भू-भाग की जटिलताओं से निपटना, स्थानीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखना। यदि ये सफल हुआ, तो उत्तराखंड सिर्फ भारत का “देवभूमि” ही नहीं बल्कि “विश्व का आध्यात्मिक व अनुभवात्मक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। जिसके लिए धामी सरकार का मोदी सरकार के साथ नजदीकियां बताती है।

 

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