फोटो – गुरुद्वारा श्रीरीठासाहिब में चारों साहिबज़ादों के शौर्य और बलिदान को स्मरण करते श्रद्धालु।
चम्पावत। लधियाघाटी क्षेत्र में स्थित दुनिया भर में मीठे रीठों के चमत्कार के लिए प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्रीरीठासाहिब में आज दसवें सिख गुरु गुरु गोविंद सिंह जी महाराज एवं उनके चारों साहिबज़ादों अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंहकी शहादत को श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किया गया। अल्पायु में मुगल अत्याचारों के सामने न झुककर धर्म और आस्था की रक्षा हेतु दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान को याद कर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
कार्यक्रम से पूर्व वीर बाल दिवस के अवसर पर एक रैली निकाली गई, जिसमें चारों साहिबज़ादों की वीरता और अदम्य साहस के जयकारे लगाए गए। पहली बार इस क्षेत्र के लोगों ने जब इन बाल वीरों के शौर्य और पराक्रम की विस्तृत गाथा सुनी, तो हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं और वातावरण श्रद्धा से भर उठा।
गुरुद्वारा परिसर में आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता भाजपा जिला अध्यक्ष गोविंद सामंत ने की तथा संचालन मंडल प्रभारी राजू बिष्ट ने किया। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक एवं भाजपा प्रांतिय कार्यकारणी सदस्य सतीश चंद्र पांडे ने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण गीता में अर्जुन को बताते हैं कि धर्म की हानि होने पर वे स्वयं अवतार लेते हैं, उसी प्रकार सिख धर्म के सभी दस गुरु साधारण मानव नहीं बल्कि महामानव थे, जिन्होंने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होकर सनातन परंपरा की रक्षा की।
मुख्य अतिथि भाजपा संगठन के सह जिला प्रभारी हिमांशु बिष्ट ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण धर्म रक्षकों और वीर बालकों के इतिहास को लंबे समय तक दबाकर रखा गया। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उन गौरवशाली अध्यायों को पुनः उजागर किया जा रहा है और साहिबज़ादों के जन्मदिवस को वीर बाल दिवस के रूप में पूरे देश में सम्मान के साथ मनाया जा रहा है।
इस अवसर पर मुकेश कलखुडींया, जगदीश बोहरा, एडवोकेट गौरव पांडे, नवीन रसीला, दीपेंद्र कुलियाल, प्रदीप जोशी, भाजपा जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष मुकेश जोशी, पवन नाथ, सूरज कुमार, शैलेंद्र बोहरा सहित अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इससे पूर्व गुरुद्वारे में शबद पाठ किया गया। गुरुद्वारे के ग्रंथी निर्मल सिंह को सम्मानित किया गया। सभी ने साहबजादों के अलावा गुरु गोविन्द सिंह महाराज के श्रीचरणों में मत्था टेका।
