फोटो – मेजर जनरल मनोज खर्कवाल ।
लोहाघाट। सैन्य परंपरा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखंड, विशेषकर मॉडल जिला चंपावत के इतिहास में 26 दिसंबर की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। लोहाघाट जैसे छोटे नगर से निकलकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पदों में से एक मेजर जनरल तक पहुंचना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे जिले, क्षेत्र और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत भी है। यह उपलब्धि लोहाघाट निवासी मनोज खर्कवाल ने हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि संकल्प, परिश्रम और अनुशासन के बल पर सीमित संसाधनों के बावजूद असाधारण मुकाम पाया जा सकता है। मेजर जनरल मनोज खर्कवाल की सफलता इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि वे मॉडल जिला चंपावत के पहले ऐसे सैन्य अधिकारी बने हैं जिन्होंने इस स्तर तक पहुंचकर जिले का मान राष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया है। शिक्षाविद पिता प्रोफेसर एससी खर्कवाल और माता श्रीमती शांति खर्कवाल के संस्कारों में पले-बढ़े मनोज खर्कवाल शुरू से ही मेधावी रहे। उनकी शिक्षा-दीक्षा और सेना में लंबी, अनुशासित सेवा इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा जब परिश्रम से जुड़ती है तो इतिहास रचती है।
एनडीए से चयन और भारतीय सैन्य अकादमी से कमीशन प्राप्त करने के बाद लगभग 24 वर्षों तक आर्टिलरी रेजीमेंट में सेवाएं देना और हर दायित्व को निष्ठा से निभाना उनकी नेतृत्व क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पदोन्नति केवल एक अधिकारी की तरक्की नहीं, बल्कि उस भरोसे की मुहर है जो भारतीय सेना ने उनकी योग्यता, अनुभव और निर्णय क्षमता पर लगाई है।
मनोज खर्कवाल की इस उपलब्धि ने यह भी संदेश दिया है कि चंपावत जैसे सीमांत जिले केवल वीर सपूत ही नहीं, बल्कि उच्च सैन्य नेतृत्व देने की क्षमता भी रखते हैं। आज जब क्षेत्र के युवाओं में भविष्य को लेकर अनेक प्रश्न और असमंजस हैं, ऐसे समय में मेजर जनरल खर्कवाल का जीवन संघर्ष, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों द्वारा व्यक्त की गई शुभकामनाएं इस बात का संकेत हैं कि यह सफलता व्यक्तिगत न रहकर सामूहिक गर्व में बदल चुकी है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को सेना और राष्ट्रसेवा की ओर प्रेरित करेगी और चंपावत की पहचान को और मजबूत बनाएगी।
निस्संदेह, मेजर जनरल मनोज खर्कवाल की पदोन्नति केवल एक समाचार नहीं, बल्कि उस उम्मीद का प्रतीक है कि पहाड़ों से उठी मेहनत और लगन की आवाज़ देश की सर्वोच्च संस्थाओं तक गूंज सकती है। यही मॉडल जिले की असली पहचान और सबसे बड़ी पूंजी है। मेजर जनरल मनोज की सफलता पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केन्द्रीय मंत्री अजय टम्टा, सेतु आयोग के उपाध्यक्ष एवं दर्जा काबिना मंत्री राज शेखर जोशी, आन्ध्र प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव अनिल पुनेठा, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के सीईओ एवं सैक्रेटरी जनरल डां रंजीत मेहता, इंग्लैंड की इलारा कम्पनी के सीईओ राज भट्ट, विधायक खुशाल सिंह अधिकारी, दर्जा राज्यमंत्री श्याम पांडेय, जिलाधिकारी मनीष कुमार, एसपी अजय गणपति, बाराकोट की ब्लाक प्रमुख सीमा आर्या, महेंद्र ढ़ेक, लडवाल फाउंडेशन के चैयरमेन नरेंद्र लडवाल, नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा, जिला पंचायत सदस्य योगेश जोशी आदि तमाम प्रमुख लोगों ने उन्हें बधाई दी है
