स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से शुरू हुई निःशुल्क चिकित्सा सेवा, आज हजारों पीड़ितों के लिए बनी जीवनदायिनी संजीवनी,सेवा, समर्पण और करुणा का जीवंत केंद्र: अद्वैत आश्रम मायावती का धर्मार्थ चिकित्सालय

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फोटो – अद्वैत आश्रम मायावती के धर्मार्थ चिकित्सालय का एक दृश्य साथ में महराज श्री जसवंत सिंह जी जिनके सहयोग से अस्पताल को बड़ा रूप मिला।

लोहाघाट। युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी के चरण पड़ते ही अद्वैत आश्रम मायावती की धरती सेवा, समर्पण और करुणा की सुगंध से भर उठी। उस दौर में जब इस पूरे क्षेत्र में दूर-दूर तक चिकित्सा सुविधाओं का नामोनिशान नहीं था और लोग झाड़-फूंक के सहारे इलाज करने को मजबूर थे, तब स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा से वर्ष 1903 में यहां एक छोटे से अस्पताल की स्थापना की गई। इस अस्पताल का संचालन स्वयं कै0 श्रीमती सेमीयर द्वारा किया जाता था और निर्धन, असहाय लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जाती थी।

वर्ष 1934 में इस चिकित्सालय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटते समय मोरबी नरेश महाराजा श्री जसवंत सिंह जी का स्वास्थ्य अत्यंत खराब हो गया। आसपास कहीं बेहतर इलाज की सुविधा न होने के कारण उन्हें अद्वैत आश्रम के अस्पताल में भर्ती कराया गया। आठ दिनों तक ‘नारायण’ मानकर उनका उपचार किया गया। स्वस्थ होने के बाद महाराजाश्री ने यहां एक बड़े चिकित्सालय की आवश्यकता जताई और इसके लिए आर्थिक सहयोग का संकल्प लिया उन्हें इस बात ने अत्यंत प्रभावीत किया की यहां महराज और साधारण से व्यक्ति को नारायण मान कर उनकी सेवा की जा रही थी। उसमें करुणा, वात्सल्य, दया का भाव छिपा हुआ था। उनके दान से अलग स्थान पर नए भवन का निर्माण हुआ और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होने लगा। धीरे-धीरे यह चिकित्सालय पिथौरागढ़, नेपाल सीमा, अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों तक के रोगियों के लिए आशा का केंद्र बन गया। तत्कालीन आश्रम अध्यक्ष ब्रह्मलीन स्वामी मुमुक्षानंद जी महाराज के मार्गदर्शन में यहां नेत्र शल्य चिकित्सा और जनरल सर्जरी की शुरुआत हुई। तब से गरीबों की निस्वार्थ चिकित्सा सेवा लगातार चलती रही। आज यहां प्रतिवर्ष 50 हजार से अधिक रोगियों का निःशुल्क उपचार किया जाता है।

आज भी इस सेवा परंपरा को वैश्विक स्तर का सहयोग मिल रहा है। इंग्लैंड से प्रतिवर्ष आने वाले प्रख्यात लेप्रोस्कोपी विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा सिंह यहां केवल सेवा भाव से अपनी अमूल्य सेवाएं देते हैं। उनका कहना है कि “ईश्वर ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, लेकिन सच्चा सुकून तो अद्वैत आश्रम मायावती आकर ही मिलता है। ऐसी आबोहवा और समर्पण का भाव कहीं और देखने को नहीं मिलता।”

इसी तरह इंग्लैंड से आने वाली स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रसना चेनोइ केवल महिलाओं के जटिल ऑपरेशन करती हैं, बल्कि दूर-दराज के गांवों से रोगियों को लाने और उपचार के उनके द्वारा यहां घर भेजने के लिए बस सुविधा भी उपलब्ध कराई गई हैं।

वर्ष भर यहां विभिन्न रोगों के लिए विशेषज्ञ शिविर लगाए जाते हैं। ये विशेषज्ञ ऐसे होते हैं जिन्हें अपने क्लिनिक में समय निकालना मुश्किल होता है, लेकिन यहां आकर वे पूरी निष्ठा से सेवा कर लोगों की दुआएं बटोरते हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि इस विशाल चिकित्सालय परिसर में कहीं भी पैसे के लेन-देन के लिए कोई कैश काउंटर नहीं है। नेत्र चिकित्सा से हजारों ऐसे लोगों को नया जीवन मिला, जिनकी दुनिया अंधेरे में डूब चुकी थी। इसके बाद दंत चिकित्सा और सर्जरी सेवाओं की शुरुआत हुई। वर्ष 2012 में एक और नए भवन की स्थापना की गई, जिसमें अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाया गया, जो आज भी पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों के लिए उदाहरण है। पिछले 11 वर्षों से चिकित्सा प्रभारी के रूप में स्वामी एकदेवानंद जी महाराज के आगमन के बाद चिकित्सालय की व्यवस्थाएं नई ऊंचाइयों पर पहुंची हैं। उनका लक्ष्य हर दिन निराश चेहरों पर मुस्कान लौटाना है, जिसके लिए वे पूर्णतः समर्पित हैं। वहीं, आश्रम के अध्यक्ष विद्वान संत स्वामी शुद्धिदानंद जी महाराज के मार्गदर्शन में इस चिकित्सालय को भविष्य में ऐसा स्वरूप देने की योजना है कि यहां सभी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों और किसी भी रोगी को बाहर न जाना पड़े।

सही मायनों में कहा जाए तो अद्वैत आश्रम मायावती का यह धर्मार्थ चिकित्सालय केवल ईंट-पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि गरीबों, पीड़ितों और असहायों की आत्मा का निवास है जहां आज भी सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

 

 

 

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