नवाड़ सलानी तोक की सड़क : सत्ता का सच
गुजरोड़ा ग्रामसभा के नवाड़ सलानी तोक में एक बुजुर्ग, गरीब व्यक्ति का निधन हो गया।
दुख इस बात का है कि सड़क न होने के कारण समय पर इलाज नहीं मिल पाया और इसी तकलीफ़ ने उनकी जान ले ली।
दुख इस बात का है कि आज तक वहाँ सड़क नहीं है।
जब सड़क निर्माण की मांग को लेकर पूरन जोशी जी की पत्नी, जो वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं, स्थानीय भाजपा के प्रभावशाली नेता जी के पास पहुँचीं, तो उनसे कहा गया—
“भाजपा जॉइन कर लो, जल्दी सड़क बन जाएगी।”
ग्राम विकास की आशा में भाजपा जॉइन भी कर ली गई,लेकिन वर्षों बीत गए… सड़क आज भी नहीं बनी।
सवाल यह है—
अगर उसी स्थान पर किसी प्रभावशाली नेता ने ज़मीन ली होती, कोई प्लॉटिंग हुई होती, तो क्या सड़क अब तक बन चुकी होती?
क्या विकास का रास्ता केवल नेताओं की ज़मीनों से होकर ही गुजरता है?
नवाड़ सलानी तोक में आज भी लगभग 50 गरीब परिवार निवास करते हैं, जो बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सत्ता में बैठे लोग लोगों को बहला-फुसलाकर या दबाव में दल जॉइन कराते हैं, लेकिन उनकी असली ज़रूरतें आज भी अनसुनी रह जाती हैं।
मैंने स्वयं मोटरसाइकिल पर पूरन जोशी जी के साथ वहाँ जाकर स्थिति का जायजा लिया।
जो देखा, वह दिल को झकझोर देने वाला था।
यह केवल एक सड़क की कहानी नहीं है—
यह सत्ता की संवेदनहीनता और गरीबों के जीवन के साथ किए जा रहे खिलवाड़ की कहानी है
