जनता के जिलाधिकारी बने मनीष कुमार, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णयों से जीता जनविश्वास,यदि मेरे आदेश के बाद अधिकारियों की संवेदनहीनता से फरियादी दुबारा उसी काम के लिए आता है तो मानो प्रशासन पर उसका विश्वास हमने डिगा दिया – जिलाधिकारी

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फोटो – 92 वर्षीय वृद्ध की समस्या का समाधान करते हुएजिलाधिकारी मनीष कुमार।

 

92 वर्षीय वृद्ध तो केवल मंदिर के जीर्णोद्धार की फरियाद लेकर आए थे उनकी फरियाद तत्काल पूरी होने के साथ उन्हें दी गई कान सुनने की मशीन।

चंपावत। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अपनी विशिष्ट कार्यशैली और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण से आमजन को जिला प्रशासन के बेहद निकट ला खड़ा किया है। आज स्थिति यह है कि जनता के मन में उम्मीदें केवल किसी पद से नहीं, बल्कि डीएम मनीष कुमार के नाम से जुड़ गई हैं।

इसका जीवंत उदाहरण उस समय देखने को मिला जब कानीकोट गांव के 92 वर्षीय वृद्ध हयात सिंह अपनी जीवन की अंतिम इच्छा के साथ जनता दरबार में पहुँचे। वे अपने गांव के प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार हेतु जिलाधिकारी से अनुरोध करने आए थे। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने उन्हें अपने पास बिठाकर ससम्मान हाल-चाल पूछा और उनकी समस्या को गंभीरता से सुना। वृद्ध श्री सिंह कम सुन पाते थे, इस पर जिलाधिकारी ने समाज कल्याण विभाग से तत्काल कान की मशीन मंगवाकर उन्हें उपलब्ध कराई और मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए पर्यटन विभाग को आवश्यक निर्देश दिए।

जैसा जिलाधिकारी के बारे में उन्होंने सुना था, वैसा ही मानवीय और संवेदनशील स्वरूप उन्होंने अपनी आँखों से देखा। श्री सिंह ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में प्रशासन की ऐसी संवेदना कभी अनुभव नहीं की थी।

जनता दरबार में मोराडीं गांव की विधवा रेवती देवी को न केवल विधवा पेंशन स्वीकृत की गई, बल्कि उनके बच्चों को बाल कल्याण योजना का लाभ देने के साथ ही आवश्यक आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। वहीं दिव्यांग किशन मेहरा के मकान की सुरक्षा हेतु एक माह के भीतर प्रोटेक्शन वॉल निर्माण के निर्देश जारी किए गए। आज आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में 140 से अधिक फरियादियों ने अपनी समस्याएँ रखीं, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही समाधान किया गया। कई जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अधिकारियों को सख्त लेकिन भावनात्मक संदेश देते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याओं का समाधान निर्धारित समयसीमा में अनिवार्य रूप से किया जाए। यदि कोई फरियादी दोबारा उसी समस्या को लेकर आता है, तो यह हमारे विश्वास पर प्रश्नचिह्न होगा।

जिलाधिकारी की सोच और कार्यव्यवहार का असर अब अन्य अधिकारियों में भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। जनता दरबार में समस्याओं के निस्तारण में एडीएम केएन गोस्वामी, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, एसडीएम अनुराग आर्या, एपीडी बिम्मी जोशी, सीएमओ डॉ देवेश चौहान सहित अन्य अधिकारियों ने सक्रिय सहयोग किया। हर फरियादी के मन में यह भाव प्रबल होता दिखा कि यदि उत्तराखंड में ऐसे ही संवेदनशील और कर्मठ अधिकारी हों, तो राज्य का स्वरूप ही बदल सकता है।

 

 

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