फोटो – सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी।
चम्पावत। आज के बदलते सामाजिक परिवेश में वैवाहिक जीवन लगातार नई चुनौतियों से जूझ रहा है। शिक्षा, रोजगार, विचारों की असमानता और पारिवारिक मूल्यों में आ रहे बदलावों के कारण अनेक दांपत्य संबंध तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। स्थिति यहां तक पहुंच जाती है कि अच्छे, खाते-पीते और प्रतिष्ठित परिवारों में भी रिश्तों की मिठास कड़वाहट में बदलती जा रही है। इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव बच्चों पर पड़ता है, जिन्हें माता-पिता का संयुक्त प्रेम, स्नेह और सुरक्षित वातावरण नहीं मिल पा रहा है।
इन विकराल परिस्थितियों को देखते हुए स्टेंट स्टीटूट एंड ट्रांसफार्मरमी (सेतु) आयोग एवं राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा संयुक्त रूप से एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसके अंतर्गत विवाह से पूर्व युवक एवं युवती के बीच संवाद स्थापित करने हेतु काउंसलिंग कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। विषय विशेषज्ञों द्वारा दी जाने वाली इस काउंसलिंग का उद्देश्य भावी दंपति को वैवाहिक जीवन में आने वाली चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करना है। सेतु आयोग के उपाध्यक्ष एवं कॉरपोरेट जगत में अपनी गहरी पकड़ रखने वाले राजशेखर जोशी ने बताया कि वर्तमान समय में युवाओं के दांपत्य जीवन के समक्ष अनेक कठिनाइयाँ हैं। कहीं युवक बेरोजगार है, कहीं आय कम है, तो कहीं दोनों पति-पत्नी कार्यरत हैं और ऐसे में अर्जित धन का सही उपयोग, बच्चों की परवरिश तथा भविष्य की योजनाएं विवाद का कारण बन जाती हैं।
श्री जोशी के अनुसार, पहले परिवारों में आचार, विचार और संस्कारों की वह मजबूत डोर होती थी, जो रिश्तों को बांधे रखती थी। माता-पिता को धरती का भगवान माना जाता था, लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ में यह बंधन कमजोर पड़ गया है। कई मामलों में बेटे की शादी के बाद वही माता-पिता उसके लिए विरोधी जैसे बन जाते हैं, जो सामाजिक विघटन का गंभीर संकेत है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में कुमाऊं विश्वविद्यालय में इस विषय पर गहन मंथन किया गया है। वर्तमान में देश के 11 राज्यों तथा उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में विवाह-पूर्व काउंसलिंग केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि युवक-युवती को समय रहते मार्गदर्शन दिया जा सके और टूटते रिश्तों को बचाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बिग बास्केट द्वारा उत्तराखंड में नए केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। कुमाऊं मंडल में टनकपुर और हल्द्वानी, जबकि गढ़वाल मंडल में चंबा और चकराता में केंद्र खोले जाएंगे, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
