राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों ने अपनी सेवा सुरक्षा और भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री से सीधी गुहार, चंपावत में भी एसीएमओ को दिया ज्ञापन।

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फोटो – एसीएमओ को ज्ञापन देते एनआरएचएम के कर्मचारी।

चंपावत। एनआरएचएम कर्मचारी संगठन ने मुख्यमंत्री एवं अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र प्रेषित कर आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर जिला स्वास्थ्य समिति (डीएचएस) के माध्यम से समायोजन तथा लंबित एचआर पॉलिसी को शीघ्र लागू करने की मांग की है।

संगठन के अध्यक्ष चंद्र मोहन लडवाल और महासचिव दिनेश थ्वाल ने पत्र में अवगत कराया है कि एनआरएचएम कर्मी लंबे समय से एचआर पॉलिसी, नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नई आउटसोर्सिंग निविदा प्रक्रिया से कर्मचारियों में असमंजस और असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसका सीधा असर कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।

पत्र में संगठन ने सरकार के समक्ष तथ्यात्मक और व्यावहारिक पक्ष रखते हुए बताया कि वर्तमान आउटसोर्सिंग व्यवस्था में 18 प्रतिशत जीएसटी और 4 से 7 प्रतिशत सर्विस चार्ज के रूप में राज्य का बड़ा बजट निजी एजेंसियों को चला जाता है। यदि कर्मचारियों को जिला स्वास्थ्य समिति के माध्यम से सीधे अनुबंधित किया जाए तो इस राशि की बचत कर जनस्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ किया जा सकता है।

संगठन ने पत्र के माध्यम से चंपावत में कार्यरत 44 आउटसोर्स कर्मियों की गंभीर समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है, जिनका पिछले तीन माह से वेतन लंबित है और लगभग एक वर्ष से ईपीएफ जमा नहीं किया गया है। संगठन ने मांग की है कि इन सभी कर्मियों को जिला स्वास्थ्य समिति के माध्यम से सीधे अनुबंध पर लिया जाए तथा पूर्व में कार्यरत आउटसोर्स एजेंसियों की जवाबदेही तय कर कर्मचारियों का रुका हुआ वेतन और ईपीएफ तत्काल दिलाया जाए। संगठन ने सरकार को वर्ष 2017 के ‘आशा कार्यक्रम’ का उदाहरण देते हुए कहा है कि उस समय कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग से हटाकर सीधे डीएचएस के अधीन किया गया था, जो पूरी तरह सफल और व्यवहारिक मॉडल साबित हुआ। इसी मॉडल को अपनाकर वर्तमान समस्याओं का समाधान संभव है। पत्र के अंत में संगठन ने विश्वास व्यक्त किया है कि मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारी कर्मचारियों की पीड़ा और प्रस्तुत तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए हजारों परिवारों के हित में शीघ्र ही संवेदनशील और ऐतिहासिक निर्णय लेंगे।

 

 

 

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