
फोटो – ऋषेश्वर महादेव प्रांगण में ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिला होलियार भगवान शिव की आराधना में होली का गायन करती हुई।
लोहाघाट। काली कुमाऊं की सांस्कृतिक पहचान बनी खड़ी होली का शुभारंभ महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर लोहाघाट स्थित प्रसिद्ध ऋषेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भव्य रूप से हुआ। मंदिर प्रांगण ढोल-मंजीरों की गूंज और लोकगीतों की स्वर लहरियों से जीवंत हो उठा। पाटन, चांदमारी और लोहाघाट क्षेत्र की महिलाओं ने पारंपरिक भेष-भूषा में सुसज्जित होकर खड़ी होली का सामूहिक गायन किया। पहाड़ी परिधानों में सजी महिलाओं ने न केवल होली गीत गाए, बल्कि स्वयं ढोल और मंजीरा बजाकर कार्यक्रम की अगुवाई भी की। ग्रामीण अंचल की यह जीवंत परंपरा आज भी उतनी ही सशक्त दिखाई दी।
बैठकी होली के बाद खड़ी होली का रंग महाशिवरात्रि से प्रारंभ होकर चैत्र माह तक चलने वाली खड़ी होली, बैठकी होली के पश्चात अपने पूरे रंग में आती है। फाल्गुनी उमंग, रंग-बिरंगे परिधान, झोड़ा-चांचरी की लय और पारंपरिक होली गीतों ने माहौल को भक्तिमय और उत्सवी बना दिया। खड़ी होली के इस आयोजन को देखने और सुनने के लिए श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आलम यह रहा कि मंदिर प्रांगण भी कम पड़ गया और लोग बाहर खड़े होकर इस सांस्कृतिक धरोहर का आनंद लेते नजर आए। काली कुमाऊं की खड़ी होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण है जहां महिलाएं परंपरा की ध्वजवाहक बनकर समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।


