ओखलकांडा क्षेत्र के पीएचसी खनस्यूं में 23 फरवरी को आयोजित दिव्यांग सहायता शिविर में कथित अभद्र व्यवहार का मामला गहराया

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ओखलकांडा क्षेत्र के पीएचसी खनस्यूं में 23 फरवरी को आयोजित दिव्यांग सहायता शिविर में कथित अभद्र व्यवहार को लेकर विवाद गहरा गया है। बेस अस्पताल के चिकित्सकों ने विधायक राम सिंह कैड़ा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

 

“दबाव में नहीं बनेंगे प्रमाणपत्र”

 

चिकित्सकों का आरोप है कि शिविर के दौरान विधायक ने दिव्यांग बोर्ड की टीम पर दिव्यांगता प्रतिशत बढ़ाने के लिए दबाव बनाया। इतना ही नहीं, जो लोग निर्धारित मानकों के अनुसार दिव्यांगता की श्रेणी में नहीं आते थे, उनके भी प्रमाणपत्र जारी करने को कहा गया डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे केवल शासन के दिशा-निर्देशों और मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही प्रमाणपत्र जारी कर सकते हैं। नियमों से समझौता संभव नहीं है।

 

“शिविर रुकवाया, कमरे में बंद करने और अस्पताल बंद कराने की धमकी”

मेडिकल टीम का आरोप है कि विरोध के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और शिविर को बीच में ही समाप्त करवा दिया गया। चिकित्सकों का यह भी कहना है कि उन्हें कमरे में बंद किया गया और अस्पताल बंद कराने की धमकी दी गई।घटना के बाद बेस अस्पताल के डॉक्टरों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को पत्र लिखकर विधायक के क्षेत्र में लगने वाले सभी दिव्यांग शिविरों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।

 

पहले भी बन चुका है दबाव का माहौल

 

डॉक्टरों का दावा है कि खनस्यूं और पतलोट में पहले आयोजित शिविरों में भी इसी प्रकार का दबाव बनाया गया था। इस बार की घटना ने चिकित्सकों को खुलकर विरोध करने पर मजबूर कर दिया चिकित्सा सेवा स्वास्थ्य सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. चंचल सिंह मार्छाल ने कहा कि चिकित्सा दल की सुरक्षा और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि जब तक उचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होती, तब तक मुख्यालय के अतिरिक्त विधायक के क्षेत्र में किसी भी टीम को नामित न किया जाए।

 

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

 

यदि डॉक्टरों का बहिष्कार लागू होता है तो ओखलकांडा क्षेत्र में दिव्यांग प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रियाएं और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है खनस्यूं का यह घटनाक्रम अब केवल एक शिविर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच कार्य-सीमा और सम्मान की बहस को भी तेज कर गया है।

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