पूर्णागिरि मार्ग पर एआरटीओ मनोज बगोरीया का टैक्सी  संचालकों से संवाद, कहा यात्रियों का अनुभव ही क्षेत्र का भविष्य तय करता है,तीर्थ पर्यटन की रीढ़ हैं टैक्सी चालक: सुरक्षित व शालीन व्यवहार से बनाएं सकारात्मक पहचान

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फोटो – पूर्णागिरि मार्ग पर टैक्सी चालकों से संवाद करते एआरटीओ मनोज।

चंपावत। आगामी नववर्ष एवं बढ़ते तीर्थ पर्यटन को लेकर परिवहन विभाग ने पूर्णागिरि मार्ग पर टैक्सी संचालकों के साथ संवाद किया। इस दौरान एआरटीओ मनोज बगोरीया ने कहा कि उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थों में शामिल पूर्णागिरि धाम आने वाले समय में और अधिक व्यवस्थित स्वरूप में विकसित होगा। मुख्यमंत्री द्वारा यहां सुचारु संचालन की घोषणा के बाद क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि इस पूरी व्यवस्था में टैक्सी चालकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यात्रियों के साथ उनका व्यवहार ही क्षेत्र की छवि तय करता है। टैक्सी चालक केवल वाहन चालक नहीं, बल्कि वे इस क्षेत्र के ब्रांड एम्बेसडर हैं। यात्रियों से शालीन व्यवहार, ईमानदार किराया वसूली और सुरक्षित यात्रा व्यवस्था ही उन्हें दोबारा यहां आने के लिए प्रेरित करेगी।

एआरटीओ ने सख्त शब्दों में कहा कि शराब हर रूप में “मीठा जहर” है, और वाहन चलाते समय शराब का सेवन चालक ही नहीं, बल्कि वाहन में सवार प्रत्येक यात्री के लिए जानलेवा खतरा बन जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे में वाहन चलाने वालों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी टैक्सी संचालकों से निर्धारित किराया ही वसूलने, वाहनों में रिफ्लेक्टर, सुरक्षा संकेतक व आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य रूप से रखने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि अधिकांश टैक्सी चालक शिक्षित हैं, ऐसे में नियमों का उल्लंघन कर चालान कटवाना उनकी सोच और प्रवृत्ति के अनुरूप नहीं है।

एआरटीओ ने कहा कि यदि हम सभी मिलकर सहयोग करें तो पूर्णागिरि मेले और तीर्थ यात्रा को ऐसी सुव्यवस्थित पहचान दी जा सकती है, जिससे यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु अपनी अगली यात्रा में अन्य तीर्थ यात्रियों को भी साथ लेकर आए।

 

 

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