27 सूत्रीय मांगों के साथ डिप्लोमा इंजीनियरों की हुंकार , वेतन विसंगति समाप्त करने, पदोन्नति के अवसर बढ़ाने और पुरानी पेंशन बहाली पर सरकार से ठोस निर्णय की मांग

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फोटो – 27 सूत्रीय मांगों को लेकर एकजुट हुए डिप्लोमा इंजीनियर्स; मांगें न माने जाने पर आंदोलन की चेतावनी देते हुए।

 

चम्पावत। उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने अपने द्वादश द्विवार्षिक महाधिवेशन के अवसर पर प्रदेश सरकार के समक्ष 27 सूत्रीय मांग-पत्र रखकर अपनी लंबित समस्याओं के समाधान की जोरदार पैरवी की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित ज्ञापन में महासंघ ने वेतन विसंगतियों के शीघ्र निस्तारण, पदोन्नति के पर्याप्त अवसर और पुरानी पेंशन योजना की बहाली को प्रमुख मुद्दा बताया।

महासंघ पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के विकास कार्यों की आधारशिला माने जाने वाले डिप्लोमा इंजीनियर लंबे समय से उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, बल्कि विकास योजनाओं की गति और गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने कनिष्ठ अभियंताओं को प्रारंभिक ग्रेड पे ₹4600 प्रदान करने तथा पूर्व में उत्पन्न वेतन असमानताओं को समाप्त करने की मांग दोहराई।

पदोन्नति व्यवस्था पर भी महासंघ ने गंभीर चिंता जताई। सेवा अवधि के आधार पर न्यूनतम तीन पदोन्नतियां सुनिश्चित करने, प्रोन्नति प्रतिशत बढ़ाने और विभिन्न विभागों में समानांतर पद सृजित करने की मांग उठाई गई। पेंशन व्यवस्था को लेकर वर्ष 2005 के बाद लागू नई पेंशन योजना तथा प्रस्तावित एकीकृत पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना बहाल करने पर जोर दिया गया। महासंघ ने सहायक अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि, टेंडर प्रक्रिया में अधिक अधिकार, तथा तकनीकी कार्यों में अनावश्यक प्रशासनिक एवं राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त करने की मांग भी प्रमुखता से रखी। निर्माण व अनुरक्षण कार्यों में आ रही दिक्कतों का उल्लेख करते हुए फील्ड स्टाफ सुपरवाइजर, मेट और बेलदार की पर्याप्त नियुक्ति सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

दुर्गम क्षेत्रों और आपदा राहत कार्यों में तैनात अभियंताओं के लिए न्यूनतम ₹2 करोड़ का सामूहिक दुर्घटना बीमा, ई-ऑफिस कार्यों के लिए लैपटॉप/कंप्यूटर उपलब्ध कराने और गुणवत्ता नियंत्रण हेतु आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की मांग भी शामिल है। इसके अतिरिक्त स्थानांतरण अधिनियम में न्यायोचित संशोधन, अभियंताओं को गैर-तकनीकी कार्यों से मुक्त रखने तथा जल संस्थान, पेयजल निगम सहित अन्य विभागों में रिक्त पद शीघ्र भरने की बात कही गई।

महासंघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने मांगों की अनदेखी की तो प्रदेशभर में चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय से विकास कार्यों को नई गति और पारदर्शिता मिलेगी।

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