फोटो – आनंदी आमा के जर्जर मकान का निरीक्षण करते जिलाधिकारी मनीष कुमार।
चम्पावत। जिलाधिकारी मनीष कुमार की मानवीय संवेदना और कार्यशैली के चर्चे आज घर-घर में हो रहे हैं। जनता दरबार के अंतिम क्षणों में गोरलचौड़ निवासी वृद्धा आनंदी आमा जब जिलाधिकारी के पास पहुँचीं तो उन्होंने कांपती आवाज में कहा—“आप मेरे भाई हो, एक बार मेरे घर आकर देख लो, हम कितनी मुसीबत में जी रहे हैं। हमारा पुराना मकान कभी भी गिर सकता है।”
स्वास्थ्य पूरी तरह अनुकूल न होने और कड़ाके की ठंड के बावजूद जिलाधिकारी मनीष कुमार ने मानवीय जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हुए एसडीएम अनुराग आर्य और यू-यूएसडीएम के परियोजना प्रबंधक अंकित आर्य को साथ लिया और सीधे आनंदी आमा के घर पहुँच गए। वहाँ का दृश्य ऐसा था मानो सुदामा के घर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं आ पहुँचे हों। आनंदी आमा ने जिलाधिकारी को अपना पूरा मकान दिखाया पुरानी, सड़ी-गली लकड़ियाँ, जर्जर छत और हर पल मंडराता खतरा। आर्थिक तंगी के कारण वह मरम्मत कराने में असमर्थ थीं। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल परियोजना प्रबंधक अंकित आर्य को मकान की मरम्मत के निर्देश दिए।
इतना ही नहीं, जिलाधिकारी ने आनंदी आमा से भावुक होते हुए कहा कि जब तक घर की मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक वह अपने परिवार के साथ कलेक्ट्रेट परिसर स्थित आवास में रह सकती हैं। यह फैसला न केवल प्रशासनिक संवेदना का उदाहरण बना, बल्कि एक भाई जैसा भरोसा भी। जिलाधिकारी ने परिवार के बच्चों से बातचीत कर उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया और आश्वस्त किया “किसी बात की कमी होगी तो, मैं हूँ।” बच्चों की रुचि और भविष्य को देखते हुए उन्होंने स्कूल शिक्षा के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट प्रशिक्षण दिलाने के भी निर्देश दिए। जाते वक्त जिलाधिकारी ने परिवार के अन्य सदस्यों से कहा “आनंदी आमा सिर्फ आपकी नहीं, अब मेरी भी आमा हैं, इनका पूरा ध्यान रखें।” जिलाधिकारी की इस आत्मीयता और अपनत्व ने कुछ पलों के लिए ही सही, लेकिन इस गरीब परिवार को अपने दुख भूलने पर मजबूर कर दिया। आमा घोर गरीब के बावजूद जिलाधिकारी को अपने हाथ से बनीं अदरक व अजवाइन की चाय पिलाई कहा आप को काफी ठंड लग गई है अपना बचाव करना पहले आत्मा होती है उसके बाद परमात्मा।
