फोटो – रेघाड़ी गांव में गुलदार के हमले में मरी बकरियों का निरीक्षण करते वन विभाग के अधिकारी व ग्रामीण।
लोहाघाट। पनारघाटी क्षेत्र में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार रात रेघाड़ी गांव में गुलदार ने बहादुर सिंह रावत की गौशाला पर धावा बोलते हुए छह बकरियों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। तीन बकरियों को गुलदार जंगल की ओर घसीट ले गया, जबकि तीन बकरियां गौशाला के बाहर मृत अवस्था में पड़ी मिलीं। गौशाला में बंधी कुल सात बकरियों में से एक बकरी किसी तरह किनारे दुबक जाने के कारण बच पाई। इस घटना के बाद पूरे पनारघाटी क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल बना हुआ है। घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग काली कुमाऊं रेंज के वन कर्मी प्रकाश गिरी और नंदा वल्लभ भट्ट मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया, लेकिन निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा यह कह दिया गया कि गौशाला के बाहर मरी बकरियों का मुआवजा नहीं मिलेगा। वन विभाग के इस बयान से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब गुलदार रात में हमला करता है तो जान बचाने के लिए पशु इधर-उधर भागते हैं, ऐसे में मुआवजे का दोहरा मापदंड अपनाना सरासर ग़लत है। बाहर मरे पशुओं को मुआवजे से वंचित करना सरासर अन्याय है।
ग्रामीणों ने क्षेत्र में फैली घनी झाड़ियों और जंगल को गुलदारों का सुरक्षित अड्डा बताते हुए आशंका जताई कि एक ही गुलदार द्वारा एक साथ छह बकरियों को मारना संभव नहीं है। लोगों का कहना है कि संभवतः दो या तीन गुलदारों ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया है। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद न तो गुलदार की पकड़ के लिए ठोस कार्रवाई हो रही है और न ही क्षेत्र में प्रभावी गश्त दिखाई दे रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राय ने पीड़ित परिवार को तत्काल और पूर्ण मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि बहादुर सिंह रावत पहले घोड़ा चलाकर अपनी आजीविका चलाते थे, लेकिन घोड़े का काम बंद होने के बाद बकरी पालन ही उनके परिवार का एकमात्र सहारा रह गया था। इस घटना से परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला और गुलदार के आतंक पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


