
फाइल फोटो – जनता मिलन कार्यक्रम में अपनी समस्या लेकर पहुंचे फरियादी।
चंपावत। एक ओर जहां “जनता मिलन कार्यक्रम” के माध्यम से आम लोगों को त्वरित राहत और मौके पर समाधान का भरोसा मिल रहा है, वहीं कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही जिलाधिकारी की मंशा पर पानी फेरती नजर आ रही है। शिकायतें सुनी जा रही हैं, आदेश दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर अमल न होने से फरियादी फिर उसी चौखट पर लौटने को मजबूर हैं। हाल ही में आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में दिव्यांग दिनेश पाण्डेय और शिवराज बिष्ट के लिए रेलिंग युक्त सीसी मार्ग निर्माण, रिवर्स पलायन कर चुके दीपक पाण्डेय की समस्या तथा बाजरीकोट निवासी नरानी देवी की वृद्धा पेंशन बहाली के संबंध में जिलाधिकारी मनीष कुमार ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे। आरोप है कि ये निर्देश फाइलों से बाहर नहीं निकल पाए और पीड़ितों को अब तक राहत नहीं मिली।
इधर “हर घर नल योजना” में कथित भ्रष्टाचार, सांगों ग्राम पंचायत में पेयजल लाइन में वित्तीय अनियमितता तथा “स्वच्छ भारत मिशन” के तहत स्वीकृत सहायता राशि लाभार्थियों को न दिए जाने के मामले में समाचार प्रकाशित होने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। नंदू पाण्डेय, सुरेश जोशी (पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य) तथा बांस-बंसवाड़ी क्षेत्र के अन्य ग्रामीणों ने प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब अधिशासी अभियंता जल निगम से जूनियर इंजीनियर के साथ बैठक के लिए समय मांगा गया तो अधिकारियों ने समयाभाव का हवाला देकर जिम्मेदारी से दूरी बना ली। वहीं खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित ठेकेदारों द्वारा कुछ ग्रामीणों को मामूली धनराशि देकर मामले को दबाने की कोशिश किए जाने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हुई तो कई लोगों पर गाज गिरना तय है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब घिंघारुकोट की बोलनौल पेयजल लाइन में कथित सरकारी धन के गबन के मामले में शिकायतकर्ता द्वारा पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद प्रशासन ने शिकायतकर्ता को ही झूठा ठहरा दिया। इससे ग्रामीणों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर अविश्वास की भावना गहराने लगी है। अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से क्षुब्ध ग्रामीणों ने पुनः जनता मिलन कार्यक्रम में पहुंचकर जिलाधिकारी से सीधे मिलकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया है। अब देखना यह है कि शिकायतों की इस श्रृंखला पर प्रशासन कब तक प्रभावी कदम उठाता है या फिर फरियादी यूं ही दर-दर भटकते रहेंगे।


