उत्तराखंड में भालू से फसल नुकसान पर किसानों को मिलेगा मुआवजा, वन पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल,जड़ी-बूटी की खेती बनेगी पंचायतों की आर्थिक रीढ़, मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने को नई योजनाएं

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फोटो – वन पंचायत सरपंचों से संवाद करते मुख्य वन संरक्षक

चम्पावत। उत्तराखंड में भालू द्वारा खेती को पहुंचाए जा रहे नुकसान को लेकर वन विभाग ने किसानों को मुआवजा देने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। यह जानकारी मुख्य वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्रा ने डीएफओ कार्यालय चंपावत में आयोजित “प्रभागीय दिवस” कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर दी। इससे पूर्व उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

मुख्य वन संरक्षक ने वन पंचायत सरपंचों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि अब वन्यजीव और मानव हमलों में मृत व्यक्तियों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। साथ ही ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी विभाग स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भालू के हमले से जुड़े खर्च शासन स्तर पर वहन किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि भालू और गुलदार जब अपने प्राकृतिक मार्गों से भटकते हैं या आपस में मिलते हैं तो वे अधिक हिंसक हो जाते हैं, जबकि उनके मार्ग में बाधा न हो तो हमले की घटनाएं कम होती हैं। इस वर्ष अब तक दो गुलदार मारे गए हैं जबकि आठ को सुरक्षित पकड़ा गया है। वर्षा कम होने के कारण भालू भोजन की तलाश में आबादी की ओर आ रहे हैं। मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि अब वन पंचायतों में जड़ी-बूटी की खेती को बढ़ावा देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाएगा। साथ ही पंचायती जंगलों में अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। उन्होंने लोगों से जंगलों और आग से बचाव के लिए जागरूक रहने की अपील की और कहा कि पेड़ जीवन के हर चरण में हमारे साथ होते हैं, उनका कोई विकल्प नहीं है। कार्यक्रम के दौरान वन पंचायत सरपंचों ने जंगलों के सीमांकन, जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा, धनराशि सीधे सरपंचों के खाते में देने, मानदेय तय करने और सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए। इस अवसर पर सराहनीय कार्य करने वाले सरपंचों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि इको-टूरिज्म से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं और आने वाले समय में चंपावत जिला विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बनाएगा। इससे पूर्व मुख्य वन संरक्षक के यहां पहुंचने पर दर्जा राज्यमंत्री श्याम नारायण पाण्डेय, चम्पावत की ब्लाक प्रमुख अंचला बोहरा, बाराकोट की प्रमुख सीमा आर्या, डीएफओ आषुतोष सिंह, एसीएफ सुनील कुमार, समेत जिले के सभी रेंजरों एवं सरपंचों द्वारा स्वागत किया गया और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। उनके भ्रमण में कुमाऊं की मुख्य वन संरक्षक तेजस्विनी पाटील उत्तरी कुमाऊं के वन संरक्षक सीएस जोशी एवं डीएफओ आशुतोष सिंह पूरे समय साथ रहे। कार्यक्रम का संचालन आनन्द गिरी ने किया।

 

 

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शीघ्र होगा कुमाऊं उत्तर में वन पंचायत सरपंच सम्मेलन।

 

चम्पावत। मुख्य वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्रा ने बताया कि शीघ्र ही कुमाऊं क्षेत्र में वन पंचायत सरपंचों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें बदलती परिस्थितियों के अनुसार वन पंचायतों से जुड़े अहम निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि ताजा सर्वेक्षण के अनुसार उत्तराखंड में देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक गुलदार पाए जाते हैं।

 

 

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