
12 की 100 छात्राओं ने रेडियो की जादुई दुनिया में खुद को किया तनाव मुक्त
लोकगीतों से रेडियो को किया गुलजार
ग्राफिक एरा के स्टूडेंट्स ने सीखी रेडियो की तकनीकि बारीकियां

हल्द्वानी। विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) का सामुदायिक रेडियो स्टेशन ‘हैलो हल्द्वानी’ आज ज्ञान, तकनीक और उत्साह का केंद्र बना रहा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी ने इस अवसर पर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि सामुदायिक रेडियो समाज के अंतिम छोर तक सूचना पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है और नई पीढ़ी का इससे जुड़ना गौरव की बात है।
रेडियो के विकास, एआई की खतरों व चुनौतियों और ‘आवाजों की दुनिया’ पर मंथन हुआ. दिन की शुरुआत ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, हल्द्वानी परिसर के बीजेएमसी विभाग के 60 छात्रों के दल के साथ हुई, जिसका नेतृत्व असिस्टेंट प्रोफेसर उत्कर्ष मिश्रा ने किया। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राकेश चंद्र रयाल ने ‘आवाजों की दुनिया’ के रहस्य खोलते हुए बताया कि रेडियो के लिए आवाज का उतार-चढ़ाव और शब्दों का चयन क्यों जरूरी है। उन्होंने रेडियो के ऐतिहासिक विकास क्रम से लेकर आधुनिक ‘एआई’ (AI) के दौर तक की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। छात्रों को रेडियो के विभिन्न फॉर्मेट्स जैसे रेडियो टॉक, रेडियो ड्रामा, वृत्तचित्र और उद्घोषणा की बारीकियों से रूबरू कराया गया। विद्यार्थियों ने स्टूडियो में व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया. सभी स्टूडेंटस ने बारी बारी स्टूडियो का भ्रमण किया और वहां पर तकनीकि ज्ञान के साथ साथ रेडियो की विभिन्न विधाओं व रेडियो में आवाजो की महत्ता को जाना। बच्चों ने एक दिन आरजे बनकर हल्दवानी के लोगों को संबोधित भी किया
. दोपहर के सत्र में पीएमश्री बालिका इंटर कॉलेज, दौलिया की करीब 100 छात्राओं का दल पहुँचा। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. भारती नारायण भट्ट, प्रवक्ता अभिलाषा कीर्ति, सहायक अध्यापिका जया आर्या, प्रवक्ता प्रियंका चमयाल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप कुमार पाठक की मौजूदगी में छात्राओं ने रेडियो की तकनीकी दुनिया को करीब से देखा। आरजे अनिल नैलवाल, आरजे सुनीता भास्कर, मोहन जोशी, हरीश गोयल और वॉलेंटियर चन्द्रा जोशी ने बच्चों को न केवल माइक्रोफोन का सामना करना सिखाया, बल्कि उन्हें अपनी आवाज रिकॉर्ड करने का मौका भी दिया। छात्राओं ने उत्साह में आकर स्टूडियो में कुमाऊंनी लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति दी, जिससे पूरा परिसर सांस्कृतिक ऊर्जा से भर उठा।
भ्रमण के दौरान आयोजित विशेष शैक्षणिक सत्रों ने छात्राओं के मन से परीक्षाओं का भय दूर कर दिया। मनोविज्ञान विभाग के डॉ. ललित मोहन पंत ने ‘एग्जाम स्ट्रेस’ पर लंबी बात की। उन्होंने बच्चों को बताया कि परीक्षा केवल एक पड़ाव है, जीवन नहीं। उनके द्वारा बताए गए ‘मेमोरी ट्रिक्स’ और एकाग्रता बढ़ाने के उपायों को सुनकर बालिकाओं ने स्वीकार किया कि अब वे बोर्ड परीक्षाओं के लिए अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं। अंग्रेजी विभाग के डॉ. नागेन्द्र गंगोला ने व्यक्तित्व विकास पर जोर देते हुए बताया कि संवाद कौशल कैसे करियर की ऊंचाइयों तक पहुँचा सकता है। गृह विज्ञान विभाग की डॉ. प्रीति बोरा ने पोषण और आहार विज्ञान पर बात करते हुए मासिक धर्म के दौरान किशोरियों के स्वास्थ्य और विशेष देखभाल की आवश्यकता पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखा।
छात्राओं के खिले चेहरे और नया एक्सपोजर
दिनभर चले इन व्याख्यानों और तकनीकी सत्रों के बाद छात्राओं के चेहरों पर एक अलग ही चमक देखी गई। बच्चों ने कहा कि उन्होंने आज से पहले रेडियो को सिर्फ सुना था, लेकिन आज उसकी मेकिंग (निर्माण प्रक्रिया) देखकर उनका नजरिया बदल गया है। उन्हें महसूस हुआ कि रेडियो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बदलाव का एक सशक्त माध्यम है। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. भारती नारायण भट्ट ने इस आयोजन को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि ऐसे एक्सपोजर से ग्रामीण छात्राओं का मानसिक क्षितिज विस्तृत होता है।


