गरीबों को नारायण मानकर की सेवा, दुआओं ने कारोबारी को फर्श से अर्श तक पहुंचाया, बाराहीधाम से मिली प्रेरणा, गुड़गांव के अग्रवाल परिवार ने सेवा को बनाया जीवन का संकल्प

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फोटो – गरीबों को कंबल वितरित करते मदन सिंह बोहरा, इनसेट में गीता अग्रवाल।

लोहाघाट। यह विश्वास कि गरीबों की दुआ में वह सामर्थ्य होती है जो किस्मत की दिशा बदल देती है, यदि कहीं साकार होता दिखता है तो उसका जीवंत उदाहरण हरियाणा के गुड़गांव निवासी पद्म चंद्र अग्रवाल और उनका परिवार है। गरीबों को साधारण नहीं, बल्कि नारायण स्वरूप मानकर की गई निस्वार्थ सेवा कैसे व्यक्ति को फर्श से अर्श तक पहुंचा देती है, यह कहानी उसी सत्य की पुष्टि करती है।

पद्म चंद्र अग्रवाल को बाराहीधाम आने और यहां सेवा करने की प्रेरणा मां बाराही से मिली थी। छोटे से कारोबार से जीवन की शुरुआत करने वाले श्री अग्रवाल ने यहां जिस श्रद्धा, संवेदना और समर्पण के साथ गरीबों की सेवा की, उसका प्रतिफल यह हुआ कि उनका व्यवसाय गरीबों की सच्ची दुआओं के सहारे निरंतर फलता-फूलता गया। सेवा उनके लिए साधन नहीं, साधना बन गई। श्री अग्रवाल के अनंत ज्योति में विलीन होने के बाद उनकी धर्मपत्नी गीता अग्रवाल ने इस पुण्य परंपरा को उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ाया। उन्होंने सेवा को न केवल जीवित रखा, बल्कि उसे अपने चारों पुत्रों के जीवन-मूल्य के रूप में स्थापित किया। आज उनके चारों पुत्र प्रदीप, ललित, देवेंद्र और रवि प्रतिवर्ष शीतकाल में गरीबों को कंबल वितरित कर ठंड से राहत पहुंचाते हैं, गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग करते हैं और विद्यालयों में बच्चों को स्वेटर, जूते व अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के लिए सहारा बनते आ रहे हैं।

यह परिवार संयुक्त संस्कारों की सजीव मिसाल है, जहां संपन्नता को दिखावे का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का अवसर माना जाता है। चारों भाई सिग्नेचर ग्लोबल, गुड़गांव (हरियाणा) के नाम से जहां व्यावसायिक जगत में अपनी पहचान रखते हैं, वहीं सामाजिक सरोकारों में उनकी उपस्थिति उन्हें अलग स्थान देती है। उनके प्रयासों का लक्ष्य केवल सहायता नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में आत्मसम्मान और मुस्कान लौटाना है। गीता अग्रवाल का कहना है कि जब वह अपने सीमित प्रयासों से गरीबों के चेहरों पर मुस्कान देखती हैं, तो उन्हें अनुभव होता है कि मानो दुनिया का सारा वैभव उन्हें प्राप्त हो गया हो। उनके लिए यही ईश्वर की सच्ची कृपा और जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। इस पुण्य कार्य को धरातल तक पहुंचाने में लंबे समय तक पड़ोसी के रूप में साथ रह चुके बाराहीधाम के निकट सिमलकन्या निवासी, धार्मिक विचारों के मदन सिंह बोहरा महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा रहे हैं। उनके माध्यम से सेवा निरंतर, सहज और जरूरतमंदों तक पहुंच रही है।

 

 

 

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