कुलपति प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी ने किया पर्यावरण विज्ञान के शिक्षार्थियों से संवाद

Spread the love

 

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित एम.एससी. (पर्यावरण विज्ञान) के प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की प्रयोगात्मक कार्यशाला के दौरान आज कुलपति प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी ने शिक्षार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान विषय के वर्तमान समय में उपयोगिता, आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार दिल्ली एवं अन्य बड़े शहरों में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन के साक्ष्य हमें आपदाओं एवं अन्य रूपों में देखने को मिल रहे हैं उसके लिए यह अति आवश्यक है कि हम पर्यावरण के प्रति सवंदेनशील हों। उन्होंने भविष्य कि चुनौतियों के सापेक्ष सचेत करते हुए आवाह्न किया कि हममें से प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी तभी पर्यावरण संरक्षण एवं सतत् विकास के उद्देश्य पूर्ण हो पाएंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शिक्षार्थियों से प्रतिपुष्टि (फीडबैक) तथा सुझाव सुने और आश्वाशन दिया कि शिक्षार्थियों के हित में विश्वविद्यालय द्वारा हर संभव प्रयास जारी रहेंगे।

प्रो० पी. डी. पंत निदेशक, भौमिकी एवं पर्यावरण विज्ञान द्वारा सभी का स्वागत करते हुए कहा कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा माध्यम में प्रयोगात्मक कार्यशाला पर्यावरण विज्ञान विषय के लिए महत्वपूर्ण है जिसमें प्रायोगिक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी अतिआवश्यक है। वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के कार्यक्रम समन्वयक, डॉ. एच. सी. जोशी ने प्रयोगात्मक कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला एक सप्ताह तथा दो चरणों में आयोजित की जा रही हैं जिसके तहत प्रथम चरण में प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के लगभग 50 शिक्षार्थी प्रतिभाग कर रहे है। कार्यशाला के अंतिम दिवस में शिक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा ली जाएगी। डॉ० जोशी ने बताया कि इस कार्यशाला के दौरान शिक्षार्थियों को पर्यावरण विज्ञान विषय की प्रयोगात्मक एवं व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है इसके अतिरिक्त शिक्षार्थियों को पर्यावरण विषय की व्यवहारिक क्षमता भी विकसित करने के उदेश्य से शैक्षणिक भ्रमण भी आयोजित किये गए। उक्त शैक्षणिक भ्रमण के तहत विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. बीना तिवारी फुलारा, डॉ. प्रीति पंत एवं डॉ. खष्टी डसीला के मार्गदर्शन में शिक्षार्थियों को खगोल-भौतिकी एवं वायुमंडलीय विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख अनुसंधान केंद्र आर्यभट्ट प्रेक्षणीय विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ARIES), मनोरा पीक, नैनीताल का भ्रमण कराया गया। इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान शिक्षार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों, खगोलीय अवलोकन तकनीकों तथा जलवायु / वायुमंडलीय अनुसंधान की भूमिका से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराया गया। वायुमंडलीय एवं जलवायु परिवर्तन अनुसंधान के महत्व तथा इससे संबंधित संचालित शोध कार्य जैसे जलवायु परिवर्तन के पारिस्थितिकी तंत्र, वनस्पति एवं कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन आदि पर विस्तार से चर्चा की गयी। इस भ्रमण के लिए संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. वीरेंद्र यादव, डॉ. उमेश चंद्र दुमका एवं शोधार्थी मयंक एवं मोहित का विशेष योगदान रहा।

शैक्षणिक भ्रमण के द्वितीय चरण में शिक्षार्थियों को विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा, डॉ. नेहा तिवारी एवं डॉ. दीप्ति नेगी के मार्गदर्शन में वन अनुसंधान केंद्र, लालकुआँ का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस भ्रमण के दौरान शिक्षार्थियों को वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान से संबंधित व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से पॉपलर के उन्नत क्लोन विकास तकनीक की प्रक्रिया, उसके महत्व एवं उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी गयी साथ ही फाइकस गार्डन, हेल्थ गार्डन, औषधीय एवं सुगंधित पौधों का उद्यान, इंटरप्रिटेशन सेंटर तथा मियावाकी मॉडल का अवलोकन कराया गया। इस भ्रमण के लिए वन क्षेत्र अधिकारी (अनुसंधान) श्री नैन सिंह नेगी, श्री ज्योति प्रकाश एवं फॉरेस्टर श्रीमती सोनी का विशेष योगदान रहा।

इस संवाद कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक, डॉ. एच. सी. जोशी ने किया। कार्यक्रम के अंत में विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान डॉ. बीना तिवारी फुलारा, डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा, डॉ. नेहा तिवारी, डॉ. प्रीति पंत, डॉ. खष्टी डसीला एवं डॉ. दीप्ति नेगी आदि उपस्थित थे ।

कुलपति प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी ने किया पर्यावरण विज्ञान के शिक्षार्थियों से संवाद।

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित एम.एससी. (पर्यावरण विज्ञान) के प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की प्रयोगात्मक कार्यशाला के दौरान आज कुलपति प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी ने शिक्षार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान विषय के वर्तमान समय में उपयोगिता, आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार दिल्ली एवं अन्य बड़े शहरों में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन के साक्ष्य हमें आपदाओं एवं अन्य रूपों में देखने को मिल रहे हैं उसके लिए यह अति आवश्यक है कि हम पर्यावरण के प्रति सवंदेनशील हों। उन्होंने भविष्य कि चुनौतियों के सापेक्ष सचेत करते हुए आवाह्न किया कि हममें से प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी तभी पर्यावरण संरक्षण एवं सतत् विकास के उद्देश्य पूर्ण हो पाएंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शिक्षार्थियों से प्रतिपुष्टि (फीडबैक) तथा सुझाव सुने और आश्वाशन दिया कि शिक्षार्थियों के हित में विश्वविद्यालय द्वारा हर संभव प्रयास जारी रहेंगे।

प्रो० पी. डी. पंत निदेशक, भौमिकी एवं पर्यावरण विज्ञान द्वारा सभी का स्वागत करते हुए कहा कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा माध्यम में प्रयोगात्मक कार्यशाला पर्यावरण विज्ञान विषय के लिए महत्वपूर्ण है जिसमें प्रायोगिक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी अतिआवश्यक है। वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के कार्यक्रम समन्वयक, डॉ. एच. सी. जोशी ने प्रयोगात्मक कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला एक सप्ताह तथा दो चरणों में आयोजित की जा रही हैं जिसके तहत प्रथम चरण में प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के लगभग 50 शिक्षार्थी प्रतिभाग कर रहे है। कार्यशाला के अंतिम दिवस में शिक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा ली जाएगी। डॉ० जोशी ने बताया कि इस कार्यशाला के दौरान शिक्षार्थियों को पर्यावरण विज्ञान विषय की प्रयोगात्मक एवं व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है इसके अतिरिक्त शिक्षार्थियों को पर्यावरण विषय की व्यवहारिक क्षमता भी विकसित करने के उदेश्य से शैक्षणिक भ्रमण भी आयोजित किये गए। उक्त शैक्षणिक भ्रमण के तहत विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. बीना तिवारी फुलारा, डॉ. प्रीति पंत एवं डॉ. खष्टी डसीला के मार्गदर्शन में शिक्षार्थियों को खगोल-भौतिकी एवं वायुमंडलीय विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख अनुसंधान केंद्र आर्यभट्ट प्रेक्षणीय विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ARIES), मनोरा पीक, नैनीताल का भ्रमण कराया गया। इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान शिक्षार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों, खगोलीय अवलोकन तकनीकों तथा जलवायु / वायुमंडलीय अनुसंधान की भूमिका से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराया गया। वायुमंडलीय एवं जलवायु परिवर्तन अनुसंधान के महत्व तथा इससे संबंधित संचालित शोध कार्य जैसे जलवायु परिवर्तन के पारिस्थितिकी तंत्र, वनस्पति एवं कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन आदि पर विस्तार से चर्चा की गयी। इस भ्रमण के लिए संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. वीरेंद्र यादव, डॉ. उमेश चंद्र दुमका एवं शोधार्थी मयंक एवं मोहित का विशेष योगदान रहा।

शैक्षणिक भ्रमण के द्वितीय चरण में शिक्षार्थियों को विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा, डॉ. नेहा तिवारी एवं डॉ. दीप्ति नेगी के मार्गदर्शन में वन अनुसंधान केंद्र, लालकुआँ का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस भ्रमण के दौरान शिक्षार्थियों को वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान से संबंधित व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से पॉपलर के उन्नत क्लोन विकास तकनीक की प्रक्रिया, उसके महत्व एवं उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी गयी साथ ही फाइकस गार्डन, हेल्थ गार्डन, औषधीय एवं सुगंधित पौधों का उद्यान, इंटरप्रिटेशन सेंटर तथा मियावाकी मॉडल का अवलोकन कराया गया। इस भ्रमण के लिए वन क्षेत्र अधिकारी (अनुसंधान) श्री नैन सिंह नेगी, श्री ज्योति प्रकाश एवं फॉरेस्टर श्रीमती सोनी का विशेष योगदान रहा।

इस संवाद कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक, डॉ. एच. सी. जोशी ने किया। कार्यक्रम के अंत में विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान डॉ. बीना तिवारी फुलारा, डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा, डॉ. नेहा तिवारी, डॉ. प्रीति पंत, डॉ. खष्टी डसीला एवं डॉ. दीप्ति नेगी आदि उपस्थित थे ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *