फोटो – नवाचार के क्षेत्र में जिलाधिकारी की टीम को सम्मानित करते मुख्यमंत्री।
चम्पावत। उत्तराखंड में जंगलों में लगने वाली आग का मुख्य कारण बनने वाला पिरूल अब मॉडल जिले चम्पावत में आमदनी का साधन और ईंधन का सशक्त विकल्प बनकर उभरा है। इसी अभिनव पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। चम्पावत जनपद के इस नवाचार को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड के लिए चयनित किया गया।
दिल्ली में आयोजित 104वें स्कॉच अवार्ड के अवसर पर यह पुरस्कार जिलाधिकारी मनीष कुमार के प्रतिनिधि के रूप में सहायक परियोजना निदेशक विमी जोशी ने प्राप्त किया। विमी जोशी पिछले कई वर्षों से जनपद में महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।
स्कॉच अवार्ड इंडिया देश में सुशासन, नवाचार और विकास के क्षेत्र में दिया जाने वाला एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान है। यह पुरस्कार उन पहलों को प्रदान किया जाता है जो समाज और पर्यावरण के लिए देखा-समझा और मापा जा सकने वाला सकारात्मक बदलाव लाती हैं। जिलाधिकारी मनीष कुमार के दिशा-निर्देशन एवं नेतृत्व में मांडल जिले की नोडल एजेंसी यूकोस्ट द्वारा भींगराड़ा क्षेत्र में ग्राम प्रधान गीता भट्ट के नेतृत्व में पिरूल ब्रिकेटिंग यूनिट संचालित की जा रही है। इस पहल के अंतर्गत जंगलों में आग का कारण बनने वाला पिरूल अब महिलाओं की आय का मुख्य स्रोत बन गया है और ईंधन के रूप में एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आया है।
ग्राम प्रधान गीता भट्ट द्वारा अब तक लगभग 90 महिलाओं को इस रोजगार से जोड़ा गया है। महिलाओं से पिरूल का पूर्व संग्रह कर ₹10 प्रति किलो की दर से उसकी खरीद की जाती है, जिसके बाद उससे ब्रिकेट तैयार किए जाते हैं। गीता भट्ट का कहना है कि जिला प्रशासन, वन विभाग एवं यूकोस्ट द्वारा समय-समय पर मिलने वाले प्रोत्साहन से महिलाओं का मनोबल लगातार बढ़ा है। इस नवाचार में सहायक परियोजना निदेशक विंमी जोशी का भी विशेष योगदान रहा है, जो महिलाओं को हर स्तर पर नेतृत्व प्रदान करने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार मॉडल जिले की उस परिकल्पना को साकार करता है, जिसके तहत पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को मॉडल जिले के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान बताया। उन्होंने जनपदवासियों और जिला प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे नवाचार उत्तराखंड के लिए नई दिशा तय कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने इस पहल को और व्यापक रूप देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन आने वाले समय में पिरूल संग्रह को और अधिक क्षेत्रों तक विस्तार देने की दिशा में कार्य कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक ब्रिकेट तैयार किए जा सकें और जंगलों की आग से सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने जिले की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में लगे सभी लोगों को जिला प्रशासन की ओर से बधाई दी।
