“आदर्श जनपद” की दिशा में तेज कदम: सीएम धामी ने चम्पावत को दी विकास योजनाओं की बड़ी सौगात

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बुनियादी ढांचे से लेकर कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन और खेल तक हर क्षेत्र में विकास का खाका तैयार।

 

 

 

चम्पावत। जनपद को “आदर्श जनपद” बनाने के संकल्प के साथ पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने दौरे के दौरान विकास की नई इबारत लिखते हुए एक साथ कई बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है और चम्पावत को एक मॉडल जिले के रूप में विकसित करना प्राथमिकता में है।

मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ स्वास्थ्य, कृषि, पेयजल, सिंचाई, पर्यटन और खेल सुविधाओं के विस्तार पर जोर देते हुए कई योजनाओं को हरी झंडी दी। इनमें प्रशिक्षण हेतु टाइप-3/4 आवासीय परिसर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय भवन, डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर और दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की स्थापना जैसी अहम पहल शामिल हैं। कृषि और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 1000 परिवारों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देने और इसके लिए ₹2 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई। साथ ही जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ₹5 करोड़ की सामूहिक घेरबाड़ योजना भी लाई गई है।

सड़क और पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई मोटर मार्गों का निर्माण, बाईपास, वैली ब्रिज, 50 हैंडपंपों की स्थापना और 20 स्थानों पर सोलर लिफ्ट पेयजल सिंचाई योजनाएं शुरू की जाएंगी। इसके अलावा गांवों में सोलर लाइट, आंतरिक टाइल्स मार्ग और लिंक रोड निर्माण से ग्रामीण ढांचा मजबूत होगा। धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास को भी प्राथमिकता देते हुए ब्यानधूरा बाबा मंदिर सहित मेला स्थलों का सौंदर्यीकरण, नागनाथ मंदिर क्षेत्र में रामलीला मंच निर्माण तथा पारंपरिक कुमाऊनी शैली में विकास भवन के पुनरोद्धार की घोषणा की गई। खेल और शिक्षा क्षेत्र में भी पहल करते हुए खर्ककार्की क्षेत्र में खेल मैदान का विकास और पूर्वांचल एग्रो संस्कृत विद्यालय के पुनरोत्थान का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ किया जाए, ताकि जनता को शीघ्र लाभ मिल सके। इस मौके पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, भूतपूर्व सैनिकों, वीर नारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम जनसहभागिता का बड़ा उदाहरण बन गया।

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