1 महीने बाद भी पुलिस एक प्रतिष्ठित अखबार के पत्रकार प्रेम सिंह धामी पर हुए हमले के हमलावर का नहीं पकड़ पाई, मुख्यमंत्री धामी के पैतृक गांव से हैं – प्रेम , हमलावर ने देवलचौड में धामी के आंख पर किया था गंभीर हमला

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सच को शब्द देने वाला पत्रकार आज खुद दर्द की सुर्खी बना

पत्रकार संगठनों ने न्याय की मांग करते हुए मुख्यमंत्री, राज्यपाल और शासन-प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की

वरिष्ठ उप संपादक पर बेरहमी से हमला, आंख बचाने को दो जटिल विट्रो-रेटिना सर्जरी; चलती बस की चपेट में आने से बाल-बाल बचे

हल्द्वानी/नई दिल्ली। दैनिक जागरण हल्द्वानी में वरिष्ठ उप संपादक के रूप में कार्यरत प्रेम सिंह उर्फ धामी पर 20 अप्रैल की रात करीब 10 से 10:30 बजे के बीच सोमवर बाजार स्थित महेंद्र शोरूम के निकट, रामपुर रोड हल्द्वानी में हुए हमले ने उनकी जिंदगी बदल दी। हमले में उनकी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई और अब तक दो बड़ी सर्जरी करानी पड़ चुकी हैं। चिकित्सकों ने अभी तक दृष्टि पूरी तरह सामान्य होने को लेकर कोई निश्चित आश्वासन नहीं दिया है। घटना के बाद अब मामले में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग भी उठ रही है।

जानकारी के अनुसार, घटना से पहले आरोपी युवक ने कथित रूप से बिना किसी स्पष्ट कारण के प्रेम सिंह उर्फ धामी को बातचीत के दौरान जबरन रोक लिया। आरोप है कि उसने उनका हाथ पकड़ लिया, स्कूटी की चाबी निकाल ली और स्कूटी के आगे खड़े होकर अपने साथियों को बुलाने लगा। इस दौरान जान से मारने की धमकी भी दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। बताया जाता है कि जब प्रेम सिंह उर्फ धामी ने युवक की इस कथित अभद्रता और जबरन रोकने का विरोध किया और उसकी ओर बढ़े, तभी आरोपी ने उनके चेहरे, विशेषकर बाईं आंख और नाक पर लगातार कई घूंसे बरसा दिए। घटना के समय हेलमेट पीड़ित प्रेम सिंह उर्फ धामी ने पहना हुआ था।

आरोप है कि हमलावर इसके बाद भी नहीं रुका और अर्धमूर्छित हालत में उनका हाथ पकड़कर पूरी ताकत से सड़क पर घसीटता रहा। इस दौरान वह तेज गति से गुजर रही एक बस की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार कुछ क्षण की चूक बड़ा हादसा बन सकती थी।

घटना के समय स्कूटी पर उनके पीछे बैठे बुजुर्ग ने हमलावर युवक से हाथ जोड़कर बिना कारण मारपीट न करने और हमला रोकने की गुहार लगाई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसके बावजूद हमलावर नहीं रुका और घटना के बाद मौके से चला गया।

अगले दिन 21 अप्रैल को सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण (एमएलसी) कराया गया और पुलिस में शिकायत दी गई। परिवार और करीबी लोगों के अनुसार पीड़ित ने शुरुआती दिनों में मामले को सार्वजनिक नहीं किया ताकि आरोपी सतर्क न हो और जांच प्रभावित न हो सके। बाद में पुलिस ने 1 मई को प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की।

हमले के बाद आंख की स्थिति लगातार गंभीर बनी रही। हालत बिगड़ने पर 26 अप्रैल को एक निजी अस्पताल में आंख की आपातकालीन सर्जरी करानी पड़ी। 5 मई 2026 को सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी ने आंख की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च केंद्र (हायर सेंटर) रेफर कर दिया। इसके बाद 14 मई को दूसरी जटिल ट्रॉमा सर्जरी भी निजी अस्पताल में करानी पड़ी।

रेफर किए जाने के बाद पीड़ित ने उपचार और सेकेंड ओपिनियन के लिए देश के कई शीर्ष नेत्र संस्थानों और विट्रो-रेटिना विशेषज्ञों से परामर्श लिया। इनमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली का आरपी सेंटर, पद्मश्री डॉ. जे.एस. तितियाल, डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल दिल्ली, श्रॉफ आई सेंटर कैलाश कॉलोनी नई दिल्ली, एल.वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट, भुवनेश्वर, द आई फाउंडेशन चेन्नई तथा शंकर नेत्रालय, तमिलनाडु जैसे प्रमुख संस्थान शामिल रहे। सभी विशेषज्ञों ने आंख की स्थिति को गंभीर बताते हुए दृष्टि बचाने के लिए जटिल विट्रो-रेटिना सर्जरी की तत्काल आवश्यकता बताई। हालांकि दृष्टि कितनी हद तक वापस आ पाएगी, इसे लेकर चिकित्सकों ने स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया है।

मामले में पुलिस आरोपी की पहचान कर उससे पूछताछ कर चुकी है। हालांकि अब पीड़ित पक्ष, पत्रकारों और स्थानीय लोगों की ओर से मामले में गंभीर चोट को देखते हुए कड़ी धाराएं जोड़ने और विवेचना में तेजी लाने की मांग उठ रही है। पत्रकार संगठनों ने न्याय की मांग करते हुए मुख्यमंत्री, राज्यपाल और शासन-प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई और त्वरित न्याय नहीं मिला तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।

सहकर्मियों का कहना है कि प्रेम सिंह उर्फ धामी हमेशा शांत स्वभाव से पर्दे के पीछे रहकर दूसरों की समस्याओं और मुद्दों को खबरों के माध्यम से समाज तक पहुंचाते रहे, लेकिन इस बार हालात ऐसे बने कि वही खुद दर्द, अस्पताल और न्याय की लड़ाई का हिस्सा बन गए।

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