बग्वाल के अगले दिन निकली मां बज्र बाराही की भव्य शोभायात्रा, हजारों श्रद्धालु बने ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा के साक्षी, चार खाम और सात थोक ने निभाई सदियों पुरानी परंपरा

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फोटो : बाराही धाम देवीधुरा में शनिवार को निकाली गई मां बज्र बाराही की भव्य शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।

देवीधुरा। विश्व प्रसिद्ध बाराही धाम देवीधुरा में शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल संपन्न होने के बाद शनिवार को मां बज्र बाराही की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मां के दर्शन और इस अनूठी धार्मिक परंपरा के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु देवीधुरा पहुंचे। शोभायात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र मां बाराही के जयकारों और शंखनाद से गूंज उठा।

बग्वाल के बाद मां बाराही, मां महाकाली और मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना के बाद तीनों प्रतिमाओं को ताम्र पेटिका में विराजमान कर नंद गृह में रखा गया। रातभर लमगड़िया खाम के लोगों ने पहरा दिया। इस दौरान संतान की कामना रखने वाली महिलाओं ने दीप जलाकर मां के समक्ष मनौती मांगी।

शनिवार को आचार्य कीर्ति शास्त्री और आचार्य गिरजा जोशी ने विधि-विधान से तीनों माताओं को ताम्र पेटिका से बाहर निकाला। विशेष धार्मिक परंपरा के तहत आंखों पर काली पट्टी बांधकर और काले कंबल की आड़ में प्रतिमाओं को दूध व गंगाजल से स्नान कराया गया। इसके बाद नए परिधान और आभूषण धारण कराकर मां बाराही को सिंहासन डोले में विराजमान किया गया और शोभायात्रा शुरू हुई।

शोभायात्रा में चार खाम और सात थोक के लोग पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों के साथ शामिल हुए। सिलम चौघाड़ी तक भेषर्क गहड़वाल खाम, खोपिया दयार तक बनौली और इसके बाद बेरख गांव के मेहरा समुदाय ने मां के विग्रह को आगे ले जाने की परंपरा निभाई। मंदिर के पुजारी सगुन पिटारी सिर पर रखकर शंखनाद करते हुए सबसे आगे चल रहे थे। शोभायात्रा मचवाल स्थित मुचकंद ऋषि के आश्रम पहुंची, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। लोक मान्यता है कि मुचकंद ऋषि के वरदान के चलते मां बाराही बग्वाल के अगले दिन उन्हें दर्शन देने यहां आती हैं। मचवाल को मां बाराही का मायका भी माना जाता है। पूजा-अर्चना के बाद शोभायात्रा वापस मंदिर पहुंची और तीनों माताओं की प्रतिमाओं को पुनः ताम्र पेटिका में विराजमान किया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। चार खाम और सात थोक की यह परंपरा आज भी बाराही धाम की समृद्ध लोक संस्कृति और सदियों पुरानी धार्मिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है।

 

 

 

 

 

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