फोटो – सत्संग भवन पाटन लोहाघाट में आयोजित निरंकारी सत्संग में उपस्थित श्रद्धालु एवं संत निरंकारी मिशन के केन्द्रीय ज्ञान प्रचारक नेपाल सिंह चौधरी जी सद्गुरु के पावन संदेश पर प्रकाश डालते हुए।
लोहाघाट (चम्पावत)। सत्संग भवन पाटन, लोहाघाट में संत निरंकारी मिशन के तत्वावधान में आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में संत निरंकारी मिशन के केन्द्रीय ज्ञान प्रचारक श्री नेपाल सिंह चौधरी जी ने सद्गुरु के पावन संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हुए कहा कि मनुष्य योनि में जन्म तभी सार्थक है जब मानव अपने मूल स्वरूप की पहचान कर परमात्मा की भक्ति करे। उन्होंने कहा कि परमात्मा की जानकारी के बिना की गई भक्ति भूल के समान है, जो बिना मालिक के मजदूरी करने जैसी है।
उन्होंने अवतार वाणी का उल्लेख करते हुए कहा “भक्ति लोकी अजे नासमझणं, प्रभू को पाणां भक्ति ए। छड के सारे रगड़े झगड़े, गुरु मनउणां भक्ति ए।” श्री चौधरी जी ने बताया कि युगों-युगों से परमात्मा का ज्ञान गुरु के माध्यम से ही मानव को प्राप्त होता आया है और आज भी सनातन परंपरा के अनुसार पूर्ण सद्गुरु द्वारा यह दिव्य ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। सत्संग में दिल्ली से आए राजेन्द्र एवं गायत्री जी, हल्द्वानी से आनन्द सिंह नेगी जी, रेगडू से बद्री दत्त खोलिया जी, बंशीधर राय जी, कैलाश उपाध्याय जी, गुमान नाथ जी, केतन भट्ट जी, भीम दत्त जी, गुरु सरन जी, राधा जी, बवीता जी, मीना जी, दीपा जी, नीमा जी, रवीना जी सहित अनेक निरंकारी महात्माओं ने सहभागिता कर सद्गुरु के पावन संदेश को आत्मसात किया। कार्यक्रम के अंत में लंगर वितरण किया गया, जिसके साथ सत्संग शांति, प्रेम और सद्भाव के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
