लोहाघाट के किसानों का गौरव: डॉ. अवनी कुमार सिंह को राष्ट्रीय सम्मान। 16 वर्ष बाद भी डांक्टर सिंह के लिए किसानों में बना हुआ उनके प्रति सम्मान , सब्जी उत्पादन में नवाचार और पॉलीकल्चर को बढ़ावा देने पर वाराणसी में हुए सम्मानित

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फोटो – डॉ. अवनी कुमार सिंह को सम्मान पत्र प्रदान करते डॉ. राजेश कुमार एवं अन्य गणमान्य।

 

लोहाघाट। आज के समय में वही लोकसेवक लंबे समय तक याद किए जाते हैं, जो अपने कार्यकाल में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। लोहाघाट के कृषि विज्ञान केंद्र में लगभग छह वर्षों तक सब्जी वैज्ञानिक के रूप में अपनी विशिष्ट सेवाएं देने वाले डॉ. अवनी कुमार सिंह को 16 वर्ष बाद भी आज भी क्षेत्र के किसानों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं। डॉ. सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान लोहाघाट क्षेत्र में पॉलीकल्चर और उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से न केवल उत्पादन बढ़ा, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ। आज भी उनका क्षेत्र के किसानों से सतत संपर्क बना हुआ है और वे समय-समय पर मार्गदर्शन देते रहते हैं। हाल ही में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा देशभर में सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चार वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया, जिनमें डॉ. अवनी कुमार सिंह भी शामिल रहे। उन्हें यह सम्मान विभिन्न क्षेत्रों में रहते हुए सब्जी उत्पादन को नई पहचान देने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया गया। सम्मान समारोह में संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार, अयोध्या कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजेंद्र सिंह, पूर्व कुलपति डॉ. एमसी गौतम, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एडीजी डॉ. सुधाकर पांडे तथा एसआरवी पूर्व सदस्य डॉ मेजर सिंह भी मौजूद रहे। डॉ. सिंह ने उन्हें दिए गए सम्मान के लिए सभी प्रति आभार व्यक्त किया।

डॉ सिंह को मिले इस सम्मान पर चम्पावत जिला भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष नवीन करायत, मोहन पांडे, रमेश खर्कवाल, गंगा दत्त जोशी, प्रदीप जोशी, तारा दत्त खर्कवाल एवं अन्य किसानों ने उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल डॉ. सिंह का नहीं, बल्कि पूरे लोहाघाट क्षेत्र के किसानों का सम्मान है।

किसानों ने बताया कि डॉ. सिंह द्वारा दी गई वैज्ञानिक तकनीकों और निरंतर मार्गदर्शन से उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आया है। आज भी वे संवाद के माध्यम से किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान कर रहे हैं, जिसके लिए किसान समुदाय ने उनका आभार व्यक्त किया।

 

 

 

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