
फोटो – कुसुम और उसके पीएवी पिता भवान सिंह फर्त्याल को सम्मानित करते जिलाधिकारी मनीष कुमार एवं सिविल जज सीनियर डिवीजन भवदीप रावते।

चम्पावत। कहते हैं कि दृढ़ इच्छा शक्ति और मजबूत इरादे हों तो सफलता दूर नहीं रहती। पहाड़ों से निकलने वाली नदियां यह नहीं पूछतीं कि समुद्र कहां है, वे अपना रास्ता खुद बनाती हैं। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है बंतोली गांव की बेटी कुसुम ने, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जेआरएफ में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय स्थान प्राप्त कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया। कुसुम की इस उपलब्धि पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने उन्हें सम्मानित करते हुए कहा कि गरीबी और संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभा की चमक को कम नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, “जुगनू भी अंधेरे में अपनी रोशनी से पहचान बनाता है। कुसुम ने कठिन हालात में अपनी मेहनत और लगन से यह सिद्ध कर दिया है कि लक्ष्य पाने के लिए केवल दृढ़ निश्चय जरूरी है।”
डीएम ने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने भी गांव के सरकारी स्कूल से शिक्षा प्रारंभ की और लगातार संघर्ष करते हुए आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि मॉडल जिले में प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन हर संभव सहयोग करेगा और कुसुम को आश्वस्त किया कि उनके उच्च शिक्षा के सफर में हरसंभव मदद की जाएगी।
इससे पूर्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज सीनियर डिवीजन भवदीप रावते ने भी कुसुम और उनके पिता को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि “कांटों के बीच जैसे गुलाब खिलता है, उसी प्रकार कुसुम ने कठिन परिस्थितियों में अपनी मेहनत से सफलता की नई मिसाल कायम की है।” उन्होंने आगे की शिक्षा में किसी भी प्रकार की समस्या आने पर हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। कुसुम की इस उपलब्धि से पूरे जनपद में गर्व और उत्साह का माहौल है। उनकी सफलता अन्य छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।


