

गरीबी एवं परिस्थितयों के कारण जीवन का पल पल भारी पड़ता जा रहा था, दर्शन राम के लिए।
जिलाधिकारी को अपनी स्थिति बताता दर्शन राम।
जिलाधिकारी मनीष कुमार का भगवान के रूप में सहारा मिलने से उसकी आंखें छलछला आई।
चंपावत। बाराकोट ब्लॉक अंतर्गत रेगडुं बांस गांव के दर्शन राम के लिए जिंदगी का एक एक पल भारी पड़ता जा रहा था। दर्शन के 26 वर्षिय बेटे की गत वर्ष जुलाई माह में जंगल में बकरी चराते हुए उपर से भू स्खलन होने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। उसे सरकार के आपदा मद से इसलिए कोई मुआवजा नहीं मिला की क्षेत्रीय पटवारी द्वारा जिला प्रशासन को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि मृतक की मौत का कारण उसका मिर्गी का रोगी होना बताया गया। बेटे के खोने से आहत दर्शन राम का दुःख उस पटवारी की रीपोर्ट ने इतना बड़ा दिया कि वह जीवन से ही निराश हो गया था। एक तरफ दुसरा बेटा 16 साल से लापता है और एक झोपड़ी में रहते हुए दर्शन अपनी दिव्यांग पत्नी के साथ दोनों मौत की इंतजारी में लगे हुए थे। दर्शन राम के शरीर को परिस्थितयों ने इतना झकझोर दिया था कि उसके लिए यह जीवन ही बेकार लगने लगा था
निराश व हताश दर्शन को किसी व्यक्ति ने बताया कि आज कल चम्पावत में ऐसे जिलाधिकारी आए हैं जो गरीबों की सुन कर उनकी मदद भी कर रहे हैं। हर तरफ से निराश हुए दर्शन राम ने किसी से कर्ज लेकर वह जन मिलन कार्यक्रम में जिलाधिकारी मनीष कुमार से मिला तथा उन्हें आप बिती बताईं। दर्शन की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी की मानवीय संवेदनाएं उमड़ पड़ी। उन्होंने दर्शन को उसी वक्त रहने के लिए आवास की स्वीकृति, उसके बेटे की मौत के कारणों की दुबारा जांच कराने, उसकी आजिविका चलाने के लिए बकरियां देने तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता देने की संस्तुति कर दी। यही नहीं दर्शन राम को सम्मान जनक ढंग से उसे उसके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था देखकर दर्शन राम के आंसू छलछला आए। जिलाधिकारी की सहृदयता को देख कर वह कुछ समय के लिए अपना दुःख दर्द भूल गया तथा उसकी आंखें आंसूओं से छलछला आई।
वह कहने लगा कि जिलाधिकारी उसके लिए ऐसे भगवान निकले जिन्होंने उसके जीवन में खुशियां भर कर भविष्य की उम्मीद बड़ा दी। जन मिलन कार्यक्रम में सभी अधिकारी व फ़रियादी इस नजारे को टकटकी निगाहों से देखते आ रहे थे। यह नजारा उन्हें अतित की ओर ले जा रहा था जब सुदामा अपनी कई उम्मीदों को लेकर अपने सखा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने गए थे। जिलाधिकारी ने दर्शन राम को अपने पास बैठा कर उसे जो सम्मान दिया उसे देखकर लोग कहने लगे कि भगवान की लीला अपरम्पार है। भगवान किसी भी रूप में मिल सकते हैं।
जिलाधिकारी को अपनी स्थिति बताता दर्शन राम

