मॉडल जिला चम्पावत में परंपरागत व्यवसायों को कुटीर उद्योग के रूप में विकसित करने की तैयारी,वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत काली कुमाऊँ के लोह शिल्प और मौन पालन को मिलेगा नया जीवन

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फोटो – जिलाधिकारी लोहाघाट के एक लौह शिल्पी कैलाश की दुकान में जाकर उसे प्रोत्साहित करते हुए साथ में लोहाघाट नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा।

चम्पावत। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत मॉडल जिला चम्पावत में काली कुमाऊँ की प्रसिद्ध लोह शिल्प कला को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ मौन पालन कार्यक्रम को कुटीर उद्योग के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। यह बात जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अपनी अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान कही।

जिलाधिकारी ने कहा कि काली कुमाऊँ की लोहे की शिल्प कला, विशेष रूप से कढ़ाई और कटारिया, अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी है, लेकिन इस व्यवसाय से जुड़े कारीगरों की संख्या सीमित होने के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे सिमटती जा रही है। इसे देखते हुए इस शिल्प को पूर्ण रूप से पुनर्जीवित किया जाएगा तथा इससे जुड़े कारीगरों को तकनीकी प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों की जानकारी और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि यह शिल्प रोजगार का सशक्त माध्यम बन सके।

उन्होंने कहा कि जिले में मौजूद लोह शिल्पियों को वर्षभर रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा बाहर से मंगाए जाने वाले कृषि यंत्रों के स्थानीय स्तर पर निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। इससे स्थानीय कारीगरों को निरंतर कार्य मिलेगा और किसानों को भी कम लागत में कृषि उपकरण उपलब्ध हो सकेंगे। बैठक में जिलाधिकारी ने मॉडल जिले में मौन पालन की अपार संभावनाओं पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि चम्पावत जनपद के घाटी, मैदानी एवं ऊँचाई वाले क्षेत्रों की भौगोलिक विविधता मौन पालन के लिए अत्यंत अनुकूल है। इसे देखते हुए मौन पालन कार्यक्रम को कुटीर उद्योग के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके।

मौन पालन कार्यक्रम को सुदृढ़ करने के लिए च्यूरा प्रजाति के पौधों का योजनाबद्ध एवं वैज्ञानिक ढंग से रोपण किया जाएगा। च्यूरा ऐसे समय में फूल देता है जब आसपास की अधिकांश वनस्पतियां सूख जाती हैं, जिससे यह मधुमक्खी पालन के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। साथ ही इससे शहद सहित अन्य मूल्य संवर्धित उत्पादों का उत्पादन कर किसानों की आय बढ़ाई जा सकेगी।

जिलाधिकारी ने उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि टनकपुर एवं बनबसा क्षेत्र में सिडकुल की स्थापना के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाए तथा कारीगरों और उद्यमियों को विशेषज्ञों के माध्यम से गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, ताकि स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हो और उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जीएस खाती, एडीएम केएन गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

 

 

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