चम्पावत में मानसून से पहले बड़ा सुरक्षा कवच: 6.15 लाख घन मीटर मलवा हटाकर नदियों का चैनलाइजेशन पूरा। हुड्डी, शारदा, किरोड़ा और लधिया नदियों में चला युद्धस्तरीय अभियान, भू-कटाव, बाढ़ और जलभराव के खतरे को कम करने की बड़ी तैयारी।

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फोटो – टनकपुर-बनबसा क्षेत्र में मानसून पूर्व नदियों का चैनलाइजेशन एवं ड्रेजिंग कार्य करते मशीनें।

 

 

टनकपुर/चम्पावत जनपद में आगामी मानसून को देखते हुए प्रशासन ने आपदा न्यूनीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में तथा स्वर्गीय सूबेदार शेर सिंह धामी की स्मृति में जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखकर व्यापक नदी चैनलाइजेशन एवं ड्रेजिंग अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन में 6 अप्रैल से टनकपुर, बनबसा और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान सिंचाई विभाग ने छीनीगोठ, आनंदपुर, चंदनी, बमनपुरी, पचपकरियां, खेतखेड़ा, अमोड़ी और देवीपुरा समेत कई क्षेत्रों में नदियों का चैनलाइजेशन एवं ड्रेजिंग कार्य युद्धस्तर पर कराया।

मानसून के दौरान हर वर्ष बढ़ते भू-कटाव, बाढ़ और जलभराव की समस्याओं को देखते हुए टनकपुर और बनबसा क्षेत्र की हुड्डी, शारदा, किरोड़ा और लधिया नदियों में विशेष कार्यवाही की गई। वन क्षेत्र अंतर्गत सिल्टेशन रोकने और जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मशीनों और श्रमिकों की मदद से नदियों के बहाव को मध्य भाग की ओर केंद्रित किया गया, जिससे नदी किनारों पर दबाव कम होगा और आबादी के साथ कृषि भूमि को कटाव से सुरक्षा मिलेगी।

करीब एक माह तक चले इस विशेष अभियान के दौरान विभिन्न नदियों से लगभग 6 लाख 15 हजार घन मीटर मलवा हटाया गया। प्रशासन का मानना है कि इससे मानसून के समय संभावित बाढ़ के खतरे में कमी आएगी, जल निकासी व्यवस्था मजबूत होगी और नदी किनारे बसे गांवों को बड़ी राहत मिलेगी।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि वर्षा ऋतु से पहले समय रहते यह महत्वपूर्ण कार्य पूरा किया गया है, जिससे हुड्डी नदी सहित अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित आपदा जोखिम को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल आपदा न्यूनीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और दीर्घकालिक सुरक्षा की दिशा में भी अहम पहल है।

प्रशासन के अनुसार ‘सारा’ अभियान के अंतर्गत संचालित जल संरक्षण गतिविधियों को भी इस कार्य से मजबूती मिली है। नदी किनारे बसे क्षेत्रों में हर वर्ष मानसून के दौरान कृषि भूमि कटाव, तटबंधों पर दबाव और आवासीय क्षेत्रों में जलभराव जैसी गंभीर समस्याएं सामने आती रही हैं। कई ग्रामीणों को विस्थापन जैसी स्थिति तक का सामना करना पड़ा है। ऐसे में इस बार पूरा हुआ चैनलाइजेशन कार्य स्थानीय लोगों के लिए राहत और सुरक्षा की बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है।

 

 

 

 

 

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