
फोटो – दीप पाठक
चंपावत। जिले की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दीप पाठक का पार्टी से दिया गया इस्तीफा आखिरकार छह महीने बाद स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही टनकपुर क्षेत्र की राजनीति में नए सियासी समीकरण बनने के कयास लगाए जाने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि करीब छह माह पूर्व दीप पाठक ने पंचायत चुनाव के दौरान जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी और संगठन में बाहरी लोगों को तरजीह देने के आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। अब पार्टी द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
मामले की पुष्टि भाजपा के टनकपुर मंडल अध्यक्ष तुलसी कुंवर ने भी की है। उन्होंने बताया कि पाठक द्वारा पूर्व में दिया गया इस्तीफा पार्टी द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टनकपुर क्षेत्र में दीप पाठक की जनता के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती रही है और उन्हें भाजपा के तेजतर्रार नेताओं में गिना जाता था। ऐसे में उनका पार्टी से अलग होना स्थानीय राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर चल रही गहमागहमी भी इस फैसले की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। पाठक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखे संदेश में भी संगठन में बाहरी लोगों को तरजीह देने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया था। फिलहाल दीप पाठक का कहना है कि वह राजनीति में जनता की सेवा के लिए आए हैं और आगे भी जनता के बीच रहकर सेवा करते रहेंगे। वहीं उनके इस्तीफे के बाद टनकपुर की सियासत में आगे क्या नया मोड़ आएगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।


