पाटी ब्लॉक के दूरस्थ गांवों के लोगों को सड़क की सौगात से खिले चेहरे: 40 किमी दूर से आए ग्रामीण डीएम से मिलकर खुश होकर लौटे

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पाटी ब्लॉक के दूरस्थ गांवों के लोगों ने जिलाधिकारी मनीष कुमार की त्वरित कार्यशैली की सराहना की, बुजुर्गों ने दिया आशीर्वाद।

 

फोटो – 40 किलोमीटर दूर से आकर सड़क सुविधा की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते पाटी ब्लॉक के दूरस्थ गांवों के ग्रामीण।

चंपावत। जिले के पाटी ब्लॉक के दूरस्थ एक दर्जन गांवों से आए 35 से अधिक ग्रामीण सोमवार को सड़क सुविधा की मांग को लेकर जिलाधिकारी मनीष कुमार से मिले। 40 किलोमीटर की कठिन यात्रा तय कर आए ये ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर चिंतित थे, लेकिन जिलाधिकारी की संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय के बाद वे सभी संतोष और खुशी के साथ अपने घर लौटे। ग्रामीणों का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता नंदू पाण्डेय और 90 वर्षीय पूर्व सरपंच रतन सिंह बिष्ट और 85 वर्षीय खिलानंद जोशी कर रहे थे। दोनों बुजुर्ग पहली बार जनता दरबार में पहुंचे थे। जिलाधिकारी द्वारा जिस सहजता, धैर्य और गंभीरता से समस्याएं सुनी गईं और मौके पर ही समाधान का आश्वासन दिया गया, उसे देखकर दोनों बुजुर्ग भावुक हो उठे। उन्होंने कहा,

“यह कोई साधारण इंसान नहीं, बल्कि महामानव हैं।”

बुजुर्गों ने जिलाधिकारी के माता-पिता को ऐसे कर्मठ पुत्र को जन्म देने के लिए बधाई दी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी आशीर्वाद दिया कि उन्होंने चंपावत जैसे दूरस्थ जिले को ऐसा जिलाधिकारी दिया।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने सड़क समस्या को लेकर आए सभी ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि अब उन्हें लंबे समय तक पैदल चलने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ेगी। प्रस्तावित 4 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण से घिंघारुकोट, कोटना पटन गांव, गजू, बसंत, बांस, बांसवाड़ा, सांगो सहित कई गांवों की ब्लॉक मुख्यालय तक दूरी लगभग 20 किलोमीटर कम हो जाएगी।

इस सड़क के बनने से बांस बसवाड़ी क्षेत्र की उपजाऊ भूमि में उगाई जाने वाली सब्जियां, आलू, प्याज, अदरक और फल अब आसानी से मंडियों तक पहुंच सकेंगे। अभी तक किसान उत्पादन तो करते थे, लेकिन परिवहन सुविधा न होने से उन्हें मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। यही कारण रहा कि क्षेत्र से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क बनती है तो 25 से अधिक पलायन कर चुके परिवार दोबारा अपनी मातृभूमि लौटने को तैयार हैं। रतन सिंह बिष्ट और खिलानंद जोशी ने भावुक होते हुए कहा “हमने तो जैसे-तैसे जीवन काट लिया, लेकिन आज सड़क मिलने की उम्मीद से बच्चों के चेहरों पर जो मुस्कान आई है, उसे देखकर हमारी उम्र ही बढ़ गई।”

 

 

 

 

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