बंतोली की बेटी कुसुम ने रचा इतिहास, जेआरएफ में चयनित होकर बढ़ाया क्षेत्र का मान,सामाजिक समरसता की मिसाल रहे परिवार की होनहार बेटी ने सरकारी स्कूल से पढ़कर हासिल की राष्ट्रीय सफलता

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फोटो – कुमारी कुसुम फर्त्याल।

 

लोहाघाट। नियति का शाश्वत नियम है कि अच्छे कर्मों का प्रतिफल अवश्य मिलता है और पुण्य कार्यों का फल पीढ़ियां भोगती हैं। बंतोली के सामाजिक सरोकारों से जुड़े भवान सिंह फर्त्याल और बापरु क्षेत्र के नारायण सिंह फर्त्याल ने वर्षों से बंद पड़े दोनों गांव के बीच ‘हुक्का-पानी’ को फिर से शुरू कर दोनों गांवों के बीच 75 साल पुरानी दूरी को खत्म किया था जिसमें गांव में स्वस्थ सामाजिक माहौल पैदा हो गया। दोनों गांव की इष्ट मां भगवती के मंदिर को साक्षी बनाकर समाज में जो नई चेतना जागृत हुई उसके बाद सभी ने मिलकर गांव के इस मंदिर को दिव्य व भव्य रुप दे दिया। आज उसी परिवार पीएलवी भवान सिंह फर्त्याल की बेटी कुमारी कुसुम ने राष्ट्रीय स्तर पर जेआरएफ में चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। पांच चयनित अभ्यर्थियों में स्थान बनाकर कुसुम ने यह साबित कर दिया कि यदि आगे बढ़ने का जज्बा हो तो सरकारी विद्यालय भी सफलता के द्वार खोल सकते हैं।

कुसुम ने प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई गांव के ही जीआईसी बापरु से पूरी करने के बाद उन्होंने लोहाघाट स्थित राजकीय पीजी कॉलेज से रसायन विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर किया। जिसमें वह कालेज की टांपर रही। वर्ष 2024 में उन्होंने नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जेआरएफ परीक्षा में भी सफलता हासिल की।

परिवार की आर्थिक स्थिति कहीं कुसुम के कैरियर में बाधा न बने, इसके लिए छोटी बहन मीनाक्षी ने स्नातक के बाद देहरादून में नौकरी कर बड़ी बहन का हौसला बढ़ाया। उसने कुसुम को पढ़ाई पर पूरा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर सहयोग किया।

कुसुम अपनी सफलता का श्रेय माता धनी देवी, पिता भवान सिंह फर्त्याल तथा अपनी छोटी बहन मीनाक्षी को देती हैं। उनका लक्ष्य जीवन में उच्च शैक्षणिक मुकाम हासिल कर समाज और क्षेत्र का नाम और ऊंचा करना है।

 

 

 

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