

चंपावत। जनपद मुख्यालय के ऐतिहासिक गौरलचौड़ खेल मैदान में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। राष्ट्रीय पॉलिटेक्निक की वार्षिक खेल प्रतियोगिता शुरू होने से पहले अभ्यास के दौरान भाला (जैवलिन) लगने से इलेक्ट्रॉनिक द्वितीय वर्ष के छात्र सोमेंद्र सिंह बोहरा की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 8:30 बजे मैदान में अलग-अलग खेलों का अभ्यास चल रहा था। एक ओर फुटबॉल खेला जा रहा था, वहीं दूसरी ओर जैवलिन थ्रो का अभ्यास हो रहा था। इसी दौरान एक छात्र द्वारा फेंका गया भाला सीधे सोमेंद्र के गर्दन में जा धंसा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और साथी छात्र उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक सोमेंद्र लधियाधाटी के मछियाण गांव का निवासी था और यहां अपनी बुआ के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसकी मां दीपा उसके साथ रहती हैं, जबकि पिता गोपाल सिंह गुजरात में कार्यरत हैं। घटना की सूचना मिलते ही पिता गुजरात से चंपावत के लिए रवाना हो गए हैं। तीन बहनों के बीच इकलौते भाई की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
हादसे के बाद पॉलिटेक्निक प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। सवाल उठ रहे हैं कि एक ही मैदान में फुटबॉल और जैवलिन जैसे खतरनाक खेलों का एक साथ अभ्यास क्यों कराया जा रहा था? घटना के समय जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद क्यों नहीं थे?
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जब घायल छात्र को अस्पताल लाया गया, उस समय वहां डॉक्टर मौजूद नहीं थे। हालांकि चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि छात्र को अस्पताल लाने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक रेखा यादव मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। एसपी रेखा यादव ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने भी परिजनों को हर संभव मदद और न्याय का भरोसा दिलाया।
बताया जाता है कि सोमेंद्र का चयन अग्निवीर योजना में हो गया था, लेकिन परिवार के कहने पर उसने पॉलिटेक्निक में दाखिला लिया था। एक उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद लिए पढ़ाई कर रहे इस छात्र की अचानक मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। यह दर्दनाक घटना हर किसी की आंखें नम कर गई एक ऐसा होनहार बेटा, जो जिंदगी की उड़ान भरने ही वाला था, वह खेल मैदान में ही काल का ग्रास बन गया।


