जब थम गई थीं सांसें… सेना के मेजर जनरल के सीपीआर और पुलिस की फुर्ती ने युवक को दी नई जिंदगी , सूखीढांग सड़क हादसे में मृत समझा जा रहा था घायल, मेजर जनरल बी.के. पात्रा के सीपीआर और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बची जान

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चम्पावत। सूखीढांग क्षेत्र हुए सड़क हादसे के बाद एक युवक की सांसें थम चुकी थीं और मौके पर मौजूद अधिकांश लोग उसे मृत मान चुके थे। लेकिन भारतीय सेना के मेजर जनरल बी.के. पात्रा की सूझबूझ, सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) और चम्पावत पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने कुछ ही मिनटों में मौत के मुंह से युवक को वापस जिंदगी की ओर लौटा दिया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद युवक सड़क पर बेसुध पड़ा था। उसके शरीर में कोई हलचल नहीं थी और सांसें भी महसूस नहीं हो रही थीं। तभी वहां से गुजर रहे मेजर जनरल बी.के. पात्रा ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल अपना वाहन रुकवाया। उन्होंने घायल की नाड़ी और श्वास की जांच की और बिना समय गंवाए बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) के तहत सीपीआर देना शुरू कर दिया। लगातार कई मिनट तक किए गए प्रयासों के बाद युवक के शरीर में हरकत हुई और उसकी सांसें दोबारा चलने लगीं। यह दृश्य देखकर घटनास्थल पर मौजूद लोग भी हैरान रह गए। जिस युवक को कुछ देर पहले तक मृत समझा जा रहा था, वह फिर से जीवन की ओर लौट आया। इसी दौरान सूचना पर पुलिस टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सेना के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए घायल युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। चिकित्सकों का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद दिया गया सीपीआर युवक के लिए जीवनदान साबित हुआ। यदि कुछ मिनट और देर हो जाती, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सड़क दुर्घटनाओं में ‘गोल्डन ऑवर’ और सही समय पर दिया गया प्राथमिक उपचार कितनी बड़ी भूमिका निभाता है। सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीक का ज्ञान कई बार किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है। सूखीढांग की यह घटना भारतीय सेना की मानवीय संवेदनशीलता, मेजर जनरल बी.के. पात्रा की तत्परता और चम्पावत पुलिस की सक्रिय कार्यशैली का प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

 

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