आर.एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी (ATI), नैनीताल ने बनभूलपुरा में नशा मुक्ति पर किया जागरूक, 40 हजार बच्चों के लिए नहीं है खेल का मैदान नशा करने को है मजबूर

 

हल्द्वानी:

 

आर.एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी (ATI), नैनीताल द्वारा बनभूलपुरा स्थित ललित आर्य महिला इंटर कॉलेज में ‘नशा मुक्त समाज – सशक्त युवा, सुरक्षित भविष्य’ विषय पर एक विस्तृत एवं गहन जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्लम व संवेदनशील क्षेत्रों में युवाओं, किशोरों और माताओं को नशे की चपेट में आने से बचाना और उन्हें पुनर्वास के मार्गों की जानकारी देना था। कार्यक्रम का मंच संचालन एटीआई के डॉ अनिल कुमार मिश्रा, परियोजना निदेशक जी द्वारा बेहद कुशल व सुचारू रूप से किया गया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत में नशे के गर्त में गिरते युवाओं की वास्तविक स्थिति, पारिवारिक विघटन और इसके दूरगामी दुष्प्रभावों को दर्शाती एक अत्यंत मर्मस्पर्शी लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसने सभागार में मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया।

 

फिल्म के उपरांत जिला बाल कल्याण समिति की सदस्य विनीता पाठक ने लगभग एक घंटे तक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) के माध्यम से नशे के सभी कानूनी, सामाजिक, पारिवारिक और बाल-संरक्षण से जुड़े पहलुओं पर अत्यंत बारीकी से प्रकाश डाला। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि किस तरह नशा तस्करी का जाल बच्चों और किशोरों को निशाना बना रहा है। उन्होंने पोक्सो एक्ट, बाल न्याय (जेजे) एक्ट और चाइल्ड हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से समझाया। विनीता पाठक ने माताओं और अभिभावकों को प्रेरित करते हुए कहा कि बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलावों पर नजर रखना और समय रहते बाल कल्याण समिति या चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद लेना ही बच्चे को दलदल से निकाल सकता है।

 

तत्पश्चात बेस अस्पताल के मनोचिकित्सक ने युवाओं में बढ़ती नशामुक्ति की लत के डॉक्टरी, न्यूरोलॉजिकल और मानसिक पहलुओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा कोई चरित्रहीनता या अपराध नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक व शारीरिक बीमारी है, जिसका इलाज संभव है। उन्होंने डि-एडिक्शन (नशामुक्ति), काउंसलिंग तकनीक, विथड्रॉल सिम्पटम्स (लक्षणों) के प्रबंधन और परिजनों द्वारा दी जाने वाली साइकोलॉजिकल सपोर्ट प्रणाली के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय पर सही काउंसलिंग और दवाइयों से किसी भी व्यक्ति को नशे के चंगुल से बाहर निकाला जा सकता है।

 

कार्यक्रम में ‘हिमालयन डायलॉग्स’ की सुनीता भास्कर ने नशामुक्ति के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मॉडल्स का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड की ऐतिहासिक चेतना को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हमेशा से ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ के क्रांतिकारी विचार की भूमि रहा है, जहाँ महिला मंगल दलों और स्थानीय महिलाओं ने शराब व नशे के खिलाफ आगे बढ़कर ऐतिहासिक लड़ाइयाँ लड़ी हैं। आज जब ड्रग्स और स्मैक जैसा जहर हमारी नई पीढ़ी की जड़ों को खोखला कर रहा है, तो एक बार फिर महिलाओं को ही नेतृत्व संभालना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड को जन-भागीदारी के जरिए नशे के खिलाफ एक ऐसा मजबूत, टिकाऊ और प्रभावी मॉडल खड़ा करने की जरूरत है जो पूरी दुनिया और बाकी राज्यों के लिए एक नजीर व मिसाल बन सके।

 

एटीआई (ATI) के संयुक्त निदेशक ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन संवेदनशील व वंचित बस्तियों में नशे के खात्मे के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि एटीआई का यह प्रयास केवल एक दिन का औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक सतत चलने वाले अभियान की शुरुआत है। प्रशासन का लक्ष्य जमीनी स्तर पर जाकर अंतिम व्यक्ति तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाना है ताकि हमारी युवा ऊर्जा का उपयोग प्रदेश के नवनिर्माण में हो सके।

 

कार्यक्रम के संवाद सत्र के दौरान क्षेत्र की माताओं, महिलाओं और किशोरों ने अपनी गंभीर चिंताएं व समस्याएं मंच के समक्ष रखीं। महिलाओं और माताओं ने भावुक होकर बताया कि किस प्रकार स्मैक और सस्ते नशे के कारण उनके घरों के चिराग बुझ रहे हैं और घरेलू हिंसा बढ़ रही है। किशोरों ने भी अपने आसपास नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता को लेकर अपनी बात कही। इस अवसर पर मौजूद दो स्थानीय पार्षदों ने अपने वार्डों की ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि क्षेत्र में नशे की अवैध बिक्री और सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए पुलिस व प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे। पार्षदों ने आश्वासन दिया कि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस लड़ाई में प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं को खेल व रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का काम करेंगे।

 

इस विशाल…इस विशाल आयोजन में क्षेत्र के सभी 14 वार्डों के सम्मानित पार्षदगण, भारी संख्या में आशा कार्यकत्रियां, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षक, महिलाएं और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का समापन एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक गीत “आ गए यहाँ जवां कदम मंजिलों को ढूँढते हुए…” के साथ हुआ, जिसने पूरे माहौल में एक नई ऊर्जा, संकल्प और नशामुक्त सुरक्षित भविष्य की उम्मीद भर दी।