मॉडल जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, विशेषज्ञ डॉक्टरों के तबादलों से बढ़ी चिंता, स्थानांतरित डाक्टर टेंशन में, कई चिकित्सकों ने निरस्त कराए स्थानांतरण आदेश, जबकि कुछ डॉक्टर अब भी अनिश्चितता में; टनकपुर अस्पताल से प्रसूता महिलाओं के रेफर होने पर भी सवाल

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फोटो- लोहाघाट चिकित्सा में आई महिलाएं पूछ रही है कि उनकी डाक्टरनी का तबादला क्यूं किया गया ?

 

चम्पावत। मॉडल जिले चम्पावत की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्थानांतरण और उनके आदेशों में लगातार हो रहे बदलाव को लेकर लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय चम्पावत में तैनात सर्जन डॉ. हिमांशु पांडे का भवाली स्थानांतरण निरस्त कर दिया गया है। वहीं जिले में तैनाती के लिए प्रस्तावित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी अपने स्थानांतरण आदेश रद्द करा लिए हैं। इनमें प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा रानी, डॉ. ममता सिंह, आईसीयू विशेषज्ञ डॉ. बी.के. गुप्ता तथा उपजिला चिकित्सालय लोहाघाट के लिए प्रस्तावित हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.पी. सिंह के नाम चर्चा में हैं।
दूसरी ओर, जिले से स्थानांतरित किए गए कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों के आदेश अब भी प्रभावी हैं। इससे संबंधित चिकित्सकों में मानसिक तनाव की स्थिति बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया और उसके मानकों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कानपुर से पिथौरागढ़ स्थानांतरित की गई एक वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सक का आदेश बाद में संशोधित कर उन्हें चकरपुर अस्पताल भेज दिया गया, जबकि वहां उनके स्तर का स्वीकृत पद नहीं है। ऐसे में विभागीय प्रक्रिया और पदस्थापन व्यवस्था को लेकर भी लोगों में जिज्ञासा बनी हुई है। कि विभाग की इस दरियादिली से किए गए स्थानांतरण से उन्हें किस मद से वैतन दिया जाएगा।
इधर, टनकपुर उप जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं को संसाधनों की कमी बताकर निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जबकि जिला अस्पताल, टनकपुर व लोहाघाट अस्पतालों की प्रबंधन समिति की संयुक्त बैठक में जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कड़े शब्दों में अनावश्यक रेफरल रोकने के निर्देश दिए थे। यदि यह स्थिति सही है, तो मरीजों को मुफ्त सरकारी सुविधा के बजाय निजी अस्पतालों का खर्च उठाना क्यूं पड़ रहा है ? इसके अलावा, लोहाघाट में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. रविंद्र बोहरा और उनकी विशेषज्ञ चिकित्सक पत्नी के अलग-अलग जिलों में स्थानांतरण को लेकर भी चर्चा है। लोगों का कहना है कि यदि दोनों पति-पत्नी सरकारी सेवा में हैं, तो नियमानुसार यथासंभव एक ही स्थान या निकटवर्ती क्षेत्र में तैनाती क्यूं नहीं की गई है?
स्वास्थ्य विभाग की इन अव्यवस्थाओं और स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर जनमानस में कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री के मॉडल जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाए रखने के लिए यदि तत्काल कोई कड़े कदम नहीं उठाए गए तो “रोम जल रहा और नीरो बंसी बजा रहा” वाली कहावत चरितार्थ होगी।

 

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