

फोटो – स्वाला डेंजर ज़ोन का उपचार कार्य पूरा होने पर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराते जनप्रतिनिधि और जिलाधिकारी मनीष कुमार।
लगातार निरीक्षण और सख्त निगरानी से समय पर पूरा हुआ उपचार कार्य, अब 24 घंटे खुलेगा टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे; श्रमिकों का सम्मान कर पेश की मानवीय प्रशासन की मिसाल।
चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑल वेदर राष्ट्रीय राजमार्ग के सबसे संवेदनशील स्वाला डेंजर ज़ोन का उपचार कार्य पूरा होने के साथ ही वर्षों पुरानी बड़ी समस्या का समाधान हो गया है। इस उपलब्धि के पीछे जिलाधिकारी मनीष कुमार की लगातार जमीनी मॉनिटरिंग और प्रशासनिक सक्रियता को प्रमुख कारण माना जा रहा है। बताया जाता है कि जून 2025 में कार्यभार संभालने के बाद जिलाधिकारी ने स्वाला क्षेत्र का लगातार दौरा किया। बारिश के दौरान सड़क बंद होने से यात्रियों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए उन्होंने नियमित रूप से निर्माण कार्य की समीक्षा की और कार्यदायी संस्था के साथ समन्वय बनाकर काम में तेजी लाई। परिणामस्वरूप लंबे समय से चुनौती बने इस डेंजर ज़ोन का उपचार कार्य निर्धारित समय में पूरा हो सका। अब इस कार्य के पूरा होने से टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात के समय लगने वाले प्रतिबंध समाप्त हो गए हैं और 24 घंटे यातायात सुचारू रहेगा। इससे सीमांत क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद आयोजित कार्यक्रम में दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे, मुकेश महराना, विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, शंकर पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा समेत जिलाधिकारी मनीष कुमार का विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया कि उनकी लगातार निगरानी के कारण इस मार्ग में चलने वाले हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली है। जिला प्रशासन और निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान सभी ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कर उपलब्धि का जश्न भी मनाया।
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श्रमिकों को घर बुलाकर जब कराया था भोज, डीएम ने दिया सम्मान का संदेश ।
चंपावत। स्वाला डेंजर ज़ोन पर कार्य पूरा होने के बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार के संबन्ध श्रमिकों से इतने आत्मीय हो गए थे कि उन्होंने तीन माह पूर्व अपने आवास में स्वच्छता कर्मीयो को भोजन कराकर ऐसा मानवीय रिश्ता जोड़ा है,जिसमें हर श्रमिक अपने को सम्मानित महसूस करने के साथ उनकी कार्य क्षमता भी काफी बड़ी है। यह भी पहला अवसर था। जब तीज त्यौहारों के अवसर पर डीएम खुद मिठाई लेकर उनके बीच पहुंच जाते है। इस परंपरा ने डीएम का समाज में बहुत आदर बढ़ा है।


