

फोटो—अद्वैत आश्रम मायावती का घना जंगल। इनसेट में आश्रम के अध्यक्ष एवं प्रभागीय वनाधिकारी।
मायावती में बाघ की दहाड़ और गुलदार की आवाजाही के बीच वन विभाग सतर्क, संवेदनशील इलाकों में ट्रैप कैमरे लगाने की तैयारी
चंपावत। अद्वैत आश्रम मायावती का वन क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां के जंगलों में बंगाल टाइगर की दहाड़ सुनाई देने और आश्रम के गेस्ट हाउस के आसपास गुलदार की आवाजाही की जानकारी सामने आ रही है। शाम ढलने के बाद गुलदार का दिखाई देना इस क्षेत्र में सामान्य माना जाता है। प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों की मौजूदगी जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को दर्शाती है।

प्रभागीय वनाधिकारी धेनु पुरुषोत्तम का कहना है कि वन क्षेत्र केवल मनुष्य की जरूरतें पूरी करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वन्यजीवों का भी इन पर उतना ही प्राकृतिक अधिकार है। जंगल में मौजूद प्रत्येक जीव प्रकृति के संतुलन में अपनी भूमिका निभाता है। छोटे कीट परागण की प्रक्रिया में योगदान देते हैं, पक्षी बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते हैं और जानवरों के माध्यम से भी बीजों का प्रसार होता है। यही प्राकृतिक प्रक्रिया जंगलों में नए पौधों के विकास का आधार बनती है।
उन्होंने चिंता जताई कि कीटनाशकों का अनियंत्रित इस्तेमाल, मोबाइल टावरों और बिजली के खंभों की स्थापना तथा तेज शोर वन्यजीवों के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। धमाकों और ध्वनि प्रदूषण से वन्यजीवों के व्यवहार और प्रजनन संबंधी गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में वन क्षेत्रों के संरक्षण के साथ मानवीय गतिविधियों को पर्यावरण के अनुकूल बनाना जरूरी है।
शीतकाल में गुलदार की सक्रियता बढ़ने की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने संवेदनशील स्थानों पर गश्त बढ़ाने की तैयारी की है। डीएफओ के अनुसार वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका वाले स्थानों पर सोलर लाइट लगाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि मोबाइल टावरों और पर्यावरण को प्रभावित करने वाली अन्य परियोजनाओं की स्थापना से पहले वन विभाग की अनुमति अनिवार्य होनी चाहिए। उनका कहना है कि मॉडल जिला चंपावत में स्थापित कुछ कंपनियों द्वारा वन विभाग से अनुमति लिए जाने की स्थिति की जांच और स्पष्टता जरूरी है। विकास कार्यों के साथ पर्यावरण और जैव विविधता की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।



